ब्लाक त्रिवेदीगंज में प्रमुख पद के लिए होगा कांटे की टक्कर
सभी कर रहे हैं अपनी- अपनी जीत का दावा
बाराबंकी। भाजपा के द्वारा प्रत्याशी घोषित करने के बाद हैदरगढ़ ब्लॉक में जहां चुनावी मुकाबला एक तरफा होने की संभावना है? वहीं दूसरी ओर त्रिवेदीगंज में इस पद को लेकर कांटे की टक्कर होनी तय हैं! जाहिर है कि जहां हैदरगढ़ में मामला हर -हर की स्थिति में नजर आएगा वही त्रिवेदीगंज में चुनावी घमासान बम -बम करता दिखाई देगा?
भाजपा के द्वारा प्रत्याशी घोषित करने के बाद एकाएक हैदरगढ़ एवं त्रिवेदीगंज सहित पूरे जनपद में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चली है। जहां कई भाजपा के प्रत्याशी बनने से रह गए हैं। वहीं उन्होंने अपनी दूसरी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है? खबर यह भी है कि इसका खामियाजा भाजपा प्रत्याशियों को भुगतना पड़ सकता है? भाजपा को इससे सतर्क रहना होगा। क्योंकि कई मूल भाजपाइयों का कहना है कि समाजवादी पार्टी एवं अन्य दलों से आए हुए लोगों को जिस तरह से प्रत्याशी बनाया गया है वह कहीं ना कहीं भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं का अपमान है! जनपद के ऐसे कई ब्लॉक है जहां पर पार्टी ने दूसरे दलों से आए लोगों पर दांव खेला है। अगर हम बात करें हैदरगढ़ की तो यहां पर भाजपा नेता रामदेव सिंह के खास देशराज रावत को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। माना जा रहा है कि रामदेव सिंह के समर्थित देशराज रावत की जीत लगभग सुनिश्चित है? फिलहाल यहां सपा उनकी राह में रोड़े अटकाने की पूरी कोशिश कर रही है।
उधर दूसरी ओर त्रिवेदीगंज विकासखंड में सबसे ज्यादा तगड़ा मुकाबला होता नजर आ रहा है। यहां पर ब्लॉक प्रमुख चुनाव के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले पूर्व प्रमुख सुनील सिंह श्रीमती क्रांति देवी को चुनाव लड़ा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने त्रिवेदीगंज ब्लॉक में इस पद के लिए हाल ही में सपा से भाजपा में शामिल हुए युवा नेता अरुण शुक्ला की खास श्रीमती पूनम रावत को प्रत्याशी घोषित किया है ।जाहिर है कि अरुण शुक्ला को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जिला पंचायत सदस्य जुटाने का फायदा मिला है और पूनम प्रत्याशी बनने में सफल रही है! यहां यह भी दिलचस्प है कि चाहे वह सुनील सिंह हो या फिर अरुण शुक्ला दोनों एक जमाने में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे हैं? और दोनों ने ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भाजपा के सत्ता में रहते हुए भाजपा से अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए टिकट चाहा था। जाहिर हो कि यहां पर पूर्व प्रमुख सुनील सिंह ने भी भाजपा से श्रीमती कांति देवी को टिकट दिलवाये जाने की पुरजोर कोशिश की थी! विश्व सूत्रों का दावा है कि त्रिवेदीगंज ब्लॉक में ब्लाक प्रमुख पद के लिए तगड़ा घमासान होगा। जहां सुनील सिंह के पास इस पद को हथियाने के लिए अनुभव अस्त्र है! वहीं दूसरी ओर अरुण शुक्ला युवा जोश के साथ इस पद पर काबिज होने का प्रयास करेंगे?
खास है कि ऐसे चुनाव सत्ता के धमक के चुनाव माने जाते हैं? लेकिन यहां सुनील सिंह को भाजपा के कई दिग्गज नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है? कुल मिलाकर जहां हैदरगढ़ परमुखी के चुनाव में हर-हर की स्थिति रहेगी! वहीं दूसरी ओर त्रिवेदीगंज में ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव में बम- बम होता नजर आएगा? फिलहाल तो त्रिवेदीगंज में दोनो प्रत्याशी अपने पास ज्यादा क्षेत्र पंचायत सदस्यों के समर्थन के होने की बात कर रहे हैं?
उधर दूसरी ओर पूरे जनपद में जो मूल भाजपाई टिकट पाने से वंचित रह गए हैं। उनका आक्रोश काफी चरम पर है? ऐसे कई मूल भाजपाइयों ने कहा आज पार्टी ने उनकी त्याग तपस्या को दरकिनार कर दिया! और दूसरे दलों सेआये लोगों को पार्टी का टिकट पकड़ा दिया। देख लेना यह लोग जैसे आए थे। सत्ता बदलेगी वैसे ही भाजपा को ठेंगा दिखाकर अपने दलों को वापस लौट जाएंगे? जब इस मुद्दे पर सपा के कई जनपदीय नेताओं से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा सब किस्मत का खेल है लड्डू तो मिलने हैं? चाहे आज मिले? चाहे इंतजार करने के बाद??कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)

