भारतीय परिवेश में हमेशा प्रासंगिक रहेंगे महात्मा गांधी : बृजेश दीक्षित ‘नशा मुक्त समाज और महात्मा गांधी’ विषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन
सुहेल अंसारी संवाददाता नगर बाराबंकी एसएम न्यूज़24टाइम्स 8081991270
बाराबंकी। गाँधी भारतीय परिवेश में हमेशा प्रासंगिक रहे हैं। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर हजारों जन-सुधार कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। किसी भी देश के सतत विकास के लिए वहाँ के नागरिकों का बहु-आयामी विकास होना सबसे महत्वपूर्ण है। यह बात गांधी जयंती सप्ताह के पांचवें दिन गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट और गांधी स्मृति एवम् दर्शन समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ष्नशा मुक्त समाज और महात्मा गांधीष् विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कही। मंगलवार को गांधी भवन में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए गांधीवादी राजनाथ शर्मा ने कहा कि महात्मा गाँधी ने अपनी पुस्तक ‘सत्य से अपने प्रयोग’ में नशा मुक्त आदर्श समाज की कल्पना की थी। उन्होंने किसी भी स्वतंत्र समाज में आजाद व्यक्ति की परिकल्पना में नशा निषेध पर सबसे ज्यादा बल दिया है। वे किसी भी प्रकार की नशावर पदार्थों के सेवन के प्रबल विरोधी थे। वरिष्ठ अधिवक्ता शऊर कामिल किदवई ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी आजतक कोई भी राजकीय या केन्द्रीय सरकार ने गाँधी की इस परिकल्पना को मूर्तरूप देने में असमर्थ रही है। उनकी इस स्वप्न को स्वतंत्रता प्राप्ति को तत्पश्चात गुजरात की तत्कालीन सरकार और वर्तमान समय में बिहार की नीतीश सरकार के अलावा नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम और लक्ष्यद्वीप में पूर्ण रूप से शराबबंदी को लागू किया है। इन राज्यों में पूर्ण शराबबंदी है। पर्यावरणविद् हाजी सलाउद्दीन किदवई ने कहा कि गाँधीजी का मानना था कि अंग्रेजों का देश से जाना जितना जरूरी है उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश में पूर्ण शराबबंदी है। गाँधी जी कहते थे कि यदि मुझे 48 घंटे की भी हुकूमत दे दी जाए तो मैं एक साथ बिना मुआवजा दिए शराब की सारी दुकाने बंद करा दूंगा। बाबू जमील उर रहमान ने कहा कि शराब सिर्फ मनुष्य का स्वास्थ्य ही नहीं उसकी आत्मा का भी धीरे-धीरे नाश कर देती है। वह पशु में परिवर्तित हो जाता है। उसके अन्दर नैतिक मूल्यों का भी ह््रास होने लगता है। नशा सिर्फ प्रेम, सद्भाव और सौहार्द का करो। संगोष्ठी में प्रमुख रूप से हुमायूं नईम खान, विनय कुमार सिंह, सैय्यद ए हुसैन, रामचंद्र यादव, निशात अहमद, राजेन्द्र प्रसाद, मृत्युंजय शर्मा, नीरज दूबे, प्रद्युम्न कुमार सिंह, अम्बरीष कुमार, तरुण मिश्रा, कामता प्रसाद वर्मा, उदय प्रताप सिंह, पाटेश्वरी प्रसाद, रंजय शर्मा आदि लोग मौजूद रहे।
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