ठंडक के मौसम में छुट्टे जानवरो का जिम्मेदार कौन❓

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किसानों की फसलों को चट कर रहे छुट्टे जानवर

प्रशासन के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां

सुल्तानपुर विधान केसरी सरकार ने छुट्टे गोबांशों से निजात दिलाने के लिए युद्ध स्तर पर मुहिम चलते हुए जिले में कई स्थानों पर स्थाई /अस्थाई गौ आश्रय केन्द्र खुलवा रखा है। जिनकी देखभाल के लिए जिले से लेकर ग्रामसभा तक के जिम्मेदारों को जिम्मेदारी दी गयी है। छुट्टे गोबन्शों को गोवंश आश्रयकेन्द्र में रखकर देखभाल की जिम्मेदारी भी इन्ही जिम्मेदारों को दे गई है। किन्तु भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा कहा जाय या शासनादेश की अनदेखी कि आज भी झुंड के झुंड गोबंश किसानों के खून पसीने की खेती पर ताबड़तोड़ कहर बरपा रहे हैं। जिनका जिम्मेददार प्रशासन का कोई नही है। बताते चलें हम जयसिंहपुर तहँसीलक्षेत्र के मोतिगरपुर ब्लॉक के खानीपुर गांव में रात को आते है। सुबह आस पास के और गांवों में किसानों के फसलों को अपना चारा बनाते है। गांव के लोग झुंड के रूप में छुट्टे गोंबंशों से किसान परेशान हैं। महंगाई की मार से जूझ रहे किसानों की ब्यथा को नजरन्दाज कर रहे जिम्मेदार सरकारी अभिलेखों में “ऑल इज वेल ” करके प्रशासन को गुमराह करने पर जुटे हैं ।
अस्थाई व स्थाई गो आश्रयकेन्द्रों की क्षमता के मद्देनजर गोबन्शों की रक्षा की वीडा उठाए सरकार की मंशा फ्लॉप होती दिख रही है । क्षेत्र में लगभग सैकड़ों की संख्या में छुट्टे गोवंशों की जहां दुर्दशा ही दुर्दशा है तो वहीं किसानों के इस विकट समस्या से जिम्मेदार अनजान बने है। और यही समस्या सरकार की छीछालेदर करवा रही है। ठंडक में बचने के लिए आखिर छुट्टे गोवंश जांय तो कहां जाएं गांवों में लोगों के घरों से लेकर लोगों के पालतू पशुओं की सरिया में जवरन लड़ाई करते हुए घुस कर बैठते है ?

छुट्टा जानवरों को छोड़ने वाले लोगों पर प्रशासन कसे नकेल
छुट्टे गोवंशों की नित्य बढ़ती तादाद पर प्रशासन को गौर करना चाहिए। अन्यथा इनकी निरन्तर वृद्धि से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अतएव जिला प्रशासन को छुट्टा करने वाले दोषियों पर नियमसंगत कानूनी कार्यवाई करने की जरूरत है।

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