स्वतंत्रता सेनानी वहाब ने चरखा और खादी को जीवन अंग बनाया: राजनाथ शर्मा

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

स्मृति दिवस में बोले समाजवादी चिंतक

बाराबंकी। असहयोग आंदोलन और खिलाफत आन्दोलन में शामिल रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अब्दुल वहाब के 100वें स्मृति दिवस पर गांधी भवन में संगोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर उनकी स्मृतियों को याद करते हुए खिराजे अकीदत पेश की। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे गांधीवादी राजनाथ शर्मा ने बताया कि गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन के दौरान हिन्‍दू-मुसलमानों को एक मंच पर लाने की कोशिश चरखे के ज़रिए ही की। वे चरखा और खादी अपनाने पर न सिर्फ ज़ोर देते थे बल्कि इसे एकता के लिए ज़रूरी मानते थे और इसे मज़हबी फर्ज़ कहते थे। उन्हीं के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल वहाब ने चरखा और खादी को जीवन अंग बनाया। उन्होंने असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन में महात्मा गांधी के आह्वाहन पर सत्याग्रह किया और छः माह के कठोर कारावास की सजा हुई। उनकी सादगी, सरलता, समाज के प्रति समर्पण और राष्ट्र प्रेम हमें उन कर्तव्यों और सैद्धांतिक मूल्यों को याद दिलाता है जो वर्तमान परिदृश्य में कहीं खो गए है। संयोजक जिला कलेक्ट्रेट के पूर्व रीडर जमील उर रहमान ने बताया कि मेरे वालिद अब्दुल रहमान यह बताते थे कि मेरे दादा अब्दुल वहाब असहयोग आन्दोलन और खिलाफत आन्दोलन के सेनानी थे। जिसके चलते उन्हें आज ही के दिन यानी 10 जनवरी 1922 को अंग्रेजों ने पहली बार गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पहले उन्हें तीन माह बाराबंकी कारागार और फिर तीन माह फैजाबाद कारागार में बंदी बनाया गया। जिसकी आज सौवीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। स्व अब्दुल वहाब ने हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और सादगी से जीवन जिया। उनमें राष्ट्रभक्ति और देश प्रेम की भावना कूट कूटकर भरी थी। इस मौके पर प्रमुख रूप से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के जिलाध्यक्ष श्रवण कुमार, डॉ प्रवीण कुमार, मो इमरान किदवई, वरिष्ठ अधिवक्ता शऊर कामिल किदवई, हुमायूं नईम खान, वकार अहमद, विनय कुमार सिंह, सलाहउद्दीन किदवई, मृत्युंजय शर्मा, महबूब इलाही, अशोक जायसवाल, उमानाथ यादव, पाटेश्वरी प्रसाद, इफ्तिखार हुसैन, सत्यवान वर्मा, मो अदीब इकबाल, संजय सिंह, नीरज दुबे, मनीष सिंह, अनिल यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।

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