गौ आश्रय को लेकर हो रहा है भ्रष्टाचार, मवेशियों का नही पुरसा हाल जिम्मेदार अधिकारी और संचालक के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है
कुलदीप कुमार शर्मा संवाददाता तहसील नवाबगंज बाराबंकी की रिपोर्ट
रामनगर बाराबंकी। अमराई गांव के गौ आश्रय पर कुल कितना धन व्यय हो चुका है और व्यवस्थाओं के ऊपर प्रति दिन कितना धन व्यय हो रहा है यह बात तो सरकारी अभिलेख ही बता सकते हैं।लेकिन महा भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी व्यवस्था के मद्देनजर जिंदा मवेशियों को कुत्ते नोच नोच कर उन्हें काल के गाल में पहुंचाते हुये देखे और बताये जा रहे हैं।एक तरफ क्षेत्र में पीड़ित किसानों की ओर से उठ रही आवाजे धीरे-धीरे दम तोड़ चुकी हैं तो दूसरी तरफ गौ आश्रय के जिम्मेदार अधिकारी और संचालक के कान में जूं तक नहीं रेंग सकी है।अब लोगों में यह सवाल बड़ा है कि क्या अंधेर नगरी चैपट राजा वाली कहावत पूरी तरह से यहा पर चरितार्थ हो रही है।मालूम हो कि विकासखंड सूरतगंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत अमराई गांव में प्रदेश सरकार की ओर से विगत बर्ष गौशाला स्थापित की गई थी जिसके कारण क्षेत्रीय किसानों ने राहत भरी सांस ली थी कि अब हम लोगों की फसलों को नुकसान से छुटकारा मिलेगा।लेकिन यह क्या योगी जी की इस महत्वाकांक्षी योजना पर भी महाभ्रष्ट अधिकारी भारी साबित होते हुए निरंतर देखे जा रहे हैं।किसानों को मिलने वाली राहत दिन में तारे देखने के समान ही बनी रही।इस गौशाला के अंदर 3.80 हेक्टेयर चरागाह के नाम पर निर्माण कार्य पर भारी-भरकम धनराशि हुई है।वहा भूसा रखने के लिये तथा चारा देने टीन शेड और भवन है जिसमे कुछ का निर्माण कार्य आज भी अधूरा है।यहां शुरू से ही अव्यवस्थाओं के चलते कितने सैकड़ा मवेशी गायब हो चुके हैं और कितने मवेशियों की कब्र का स्थल अंदर और बाहर बन चुका है इसकी सही गणना क्षेत्रीय लोगों से लगाई जा सकती है।इस स्थल के निर्माण कार्य मे और चरागाह के नाम पर मनरेगा योजना से अभी तक कुल कितना धन दर्शाया जा चुका है।यह तो सरकारी अभिलेख जाने।लेकिन भारी गंदगी युक्त बदबू के साथ जिंदा मवेशियों को खा रहे कुत्ते यहां भी यहां की पहचान बताये जा रहे थे।जानकारों की माने तो बड़ी संख्या में मवेशियों को यहां से बाहर कर फिर छुट्टा घूमने के लिए छोड़ा भी जा चुका है क्षेत्र में वह मवेशी गौ आश्रय की कानों में टैग लटकाये हुये घूम रहे हैं।उन्हें बराबर देखा जा रहा है।शनिवार को संवाददाता के द्वारा वहां का भ्रमण करने के दौरान तीन मरणासन्न जिंदा मवेशी देखे गये जिनमें एक मर चुका था उसे ठेकेदार नफीस की ओर से उठाने आये अशोक कुमार तथा रघुवर उठा रहे थे जो घायल था।पूछने पर उन्होंने बताया कि कुत्तों ने नोचा है दूसरी तरफ गड्ढे में पड़े दूसरे मवेशी का भी हाल वही था जो जिंदा मरणासन्न बोरो से आधे ढके हुये आस पास पड़े थे।वह एक-दो घंटे के मेहमान बताये जा रहे थे सूखा भूसा अपर्याप्त मात्रा में चरहियो मे मौजूद था।यहां व्यवस्थाओं के लिये कुल कितने मजदूर प्रतिदिन लगाये जा रहे हैं।यह तो सरकारी अभिलेख जानै।लेकिन यहां भारी अव्यवस्था और गंदगी का बोलबाला था अमराई गांव के गौ आश्रय स्थल के निरन्तर कब्रगाह बताये जाने की चर्चाओं के मद्देनजर खंड विकास अधिकारी विजय यादव से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि वहां कोई अव्यवस्था नहीं है टीन सेड पानी बिजली सब कुछ मौजूद है। मवेशी बीमार होंगे तो मरेंगे भी आप अंदर कैसे चले गये वहां अंदर जाने के लिये पाबंदी है।
कुलदीप कुमार शर्मा संवाददाता तहसील नवाबगंज बाराबंकी की रिपोर्ट

