योगी के इकलौते मुस्लिम मंत्री : मोहसिन रजा की जगह दानिश आजाद को मिली जगह, जानें छात्रनेता से यूपी के मंत्री पद तक का सफर
शादाब अली की रिपोर्ट
छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले दानिश आजाद ने लखनऊ विश्विद्यालय से बीकॉम और फिर मास्टर ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट व मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। अब ये योगी कैबिनेट के सबसे युवा मंत्रियों में शुमार हो गए हैं।
दानिश आजाद..योगी आदित्यनाथ की सरकार में इकलौते मुस्लिम मंत्री हो सकते हैं। युवा चेहरा और बुलंद आवाज। छह साल तक भाजपा से जुड़े छात्र संगठन यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता रहे। दानिश उन चेहरों में हैं, जो पार्टी के लिए मेहनत करते रहे हैं। 2017 में इसका पहला इनाम भी उन्हें मिला। तब दानिश को उर्दू भाषा समिति का सदस्य बनाया गया। 2022 के चुनाव से ठीक पहले उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का महामंत्री बनाया गया। दानिश को मोहसिन रजा की जगह मंत्री बनाया जा रहा है। आइए जानते हैं दानिश आजाद के बारे में सबकुछ…
बलिया के रहने वाले, लखनऊ से पढ़ाई की
दानिश आजाद अंसारी मूल रूप से बलिया के बसंतपुर के रहने वाले हैं। उम्र 32 साल है। 2006 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यहीं से मास्टर ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट फिर मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। जनवरी 2011 में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ गए। यहीं से दानिश के आजाद ख्यालात लखनऊ विश्वविद्यालय में गूंजने लगे। दानिश ने खुलकर एबीवीपी के साथ-साथ भाजपा और आरएसएस के लिए युवाओं के बीच माहौल बनाया। खासतौर पर मुस्लिम युवाओं के बीच।
सरकार बनी तो मिला इनाम
2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बन गई। चुनाव में जिन-जिन लोगों ने मेहनत की थी, उन्हें इनाम मिला। इन्हीं में एक नाम था दानिश आजाद का। दानिश 2018 में फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी के सदस्य रहे। बाद में उन्हें उर्दू भाषा समिति का सदस्य बना दिया गया। ये एक तरह से दर्जा प्राप्त मंत्री का पद होता है। इस बार चुनाव से पहले अक्टूबर 2021 में दानिश को बड़ी जिम्मेदारी मिल गई। भाजपा ने अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री पद की जिम्मेदारी दे दी।
दानिश मुस्लिमों के अंसारी समुदाय से आते हैं। यूपी में अंसारी मुस्लिमों की संख्या काफी अधिक है। ये मुस्लिमों में एक तरह से पिछड़े वर्ग की जाति होती है। यूपी की सियासत में इनकी भूमिका काफी कम है। इसके उलट अगड़ी जातियां जिसमें शेख, पठान, सैय्यद, मुस्लिम राजपूत और मुस्लिम त्यागी यूपी की राजनीति में हावी हैं। ऐसे में दानिश को मंत्री बनाना भाजपा का बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। भाजपा पिछड़े मुस्लिमों को अपने साथ लाना चाहती है। तीन तलाक के ज्यादातर मामले इसी वर्ग से आते हैं। इसका भी भाजपा को फायदा मिल सकता है। वहीं, मोहसिन रजा शिया मुस्लिम हैं। वह मुस्लिमों के अगड़ी जाति से आते हैं।

