बग़ैर तज़किरा ए फ़ातिमा स.नबियों की नबूवत मुकम्मल नहीं -मौ.नदीम असग़र बग़ैर फ़ातिमा की इजाज़तजन्नत में भी कोई दाख़िल नहीं हो सकता कु़रआन के वाक़यात दोहरायें और उससे इबरत हासिल करें
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी
Related Posts
बाराबंकी ।बग़ैर फ़ातिमा की इजाज़तजन्नत में भी कोई दाख़िल नहीं हो सकता । कु़रआन के वाक़यात दोहरायें और उससे इबरत हासिल करें । बग़ैर तज़किरा ए फ़ातिमा स.नबियों की नबूवत मुकम्मल नहीं । यह बात इमामबाड़ा मीर मासूम अली में ब सिलसिलये शहादते जनाबे सिद्दीक़ा ताहेरा सय्यदा स.अ.की मजलिसे अजा़ को ख़िताब करते हुए आली जनाब मौलाना नदीम असग़रसाहब क़िबला बनारस ने कही ।उन्होंने यह भी कहा कि क़ायनात रसूल का सदक़ा है और जनाब ए फ़ातिमा अल्लाह का दिया हुआ रसूल का तोहफ़ा हैं। बग़ैर ज़िक्रे पंजतन के जब आदम की तौबा क़ुबूल न हुई तो बग़ैर ज़िक्रे आल ए मोहम्मद किसी आदमी की तौबा कैसे क़ुबूल हो जायेगी ।उन्होंने आगे यह भी कहा दुनियां की सारी क़ौमें ज़ुल्म के आगे घुटने टेक देतीं हैं ,लेकिन कर्बला का ज़िक्र करने वाले और सुनने वाले मुक़ाबले का हौसला रखते हैं ।इसी लिये हम बार बार कर्बला दोहराते हैं ।आख़िर में बीबी फ़ातिमा जहरा के मसायब पेश किये जिसे सुनते ही मोमनीन बिलख बिलख कर रोने लगे ।मजलिस से पहले उस्ताद शायर डा.रज़ा मौरान्वी ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – हम ख़ताकारों से मदहे फ़ातिमा मुमकिन नहीं, ये समन्दर वो है जिसको नापना मुमकिन नहीं ।इसके अलावा पढ़ा- वो जिनपे आके ये पत्थर कलाम करते हैं ,वो हाथ फ़ातिमा तुमको सलाम करते हैं ।रज़ा मैं उसकी फ़ज़ीलत बयान कैसे करूं , जिसे किताब के सूरे सलाम करते हैं । कलीम रिज़वी ने पढ़ा – ज़माने भर में हर सूं नूर की बरसात होती है ,कि सजदे में ख़ुदा से फ़ातिमा की बात होती है । बाक़र नक़वी ने फढ़ा – ऐ फ़लक इस घर को तूने रंज दिखलाए बहोत ,घर जलाया ग़म के बादल हर तरफ़ छाए बहोत ।अयान सल्लमहू ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया।मजलिस का आग़ाज़ तिलावते कलाम ए पाक से आली जनाब मौलाना सै. इब्ने अब्बास ने किया। अन्जुमन ग़ुन्चये अब्बासिया ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की । मोमनीन बाराबंकी की जानिब से तीन रोज़ा मजलिस की पहली मजलिस में आने वालों का शुक्रिया अदा किया। सिलसिले की दूसरी मजलिस करबला सिविल लाइन में और तीसरी मौलाना ग़ुलाम अस्करी हाल में होगी ।सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

