बाराबंकी। जो आखेरत मांगते हैं खुदा उन्हें दुनियां गिफ्ट में दे देता है। दुनियां तो आखेरत की खेती है। जो दुनियां पसन्द करते हैं उनकी आखेरत जहन्नम है। तुम्हारा रब वो है जिसकी अता गैरे मुनकता है। सूरये कौसर निहायत मुख्तसर होने के बावजूद निहायत कमाल का हामिल है। बढ़ाने वाली ताकत को फितरत और कन्ट्रोल करने वाली ताकत.को दीन कहते हैं। खैबर का फातेह ही कौसर का शाकी है। बुख्ल से बचो सखी बन जाओ, रियाकारी से बचो एखलाक से पेश आओ। कामयाबी कदम चूमेगी, दुश्मन जेर होगा। आखिर में बीबी फातिमा जहरा के मसायब पेश किये जिसे सुनते ही मोमनीन बिलख बिलख कर रोने लगे ।मजलिस से पहले बेहतरीन फिक्रों के साथ अपना कलाम पेश करते हुए अजमल किन्तूरी ने पढ़ा-जिसको शहजादिये कौनैन से बेजारी है, मेरी नजरों में यही दीन से गद्दारी है। इसका साया हमें महशर में मयस्सर होगा, ये अजादारी की सूरत में शजरकारी है। मुहिब रिजवी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-किस तरह लिक्खे कलम तेरा कसीदा जहरा,कभी कूजे में समाता नहीं दरिया जहरा। हर तरफ है तेरा कुरआन में चर्चा जहरा,आयतें तुझपे किये बैठी हैं साया जहरा। सरवर अली करबलाई ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा-बिन्ते रसूल हमसरे हैदर है फातिमा, अजमत में मुरतजा के बराबर है फातिमा।गैबत में देखो नश्ले पयम्बर है आज भी , हक है जवाबे तानये अबतर है फातिमा। अदनान रिजवी व जईम काजमी ने भी नजरानये अकीदत पेश किया। मजलिस का आगाज तिलावते कलाम ए पाक से जीशान नकवी ने किया। अन्जुमन गुन्चये अब्बासिया ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। मोमनीन बाराबंकी की जानिब से तीन रोजा मजलिस की दूसरी मजलिस में आने वालों का शुक्रिया अदा किया। सिलसिले की तीसरी मजलिस मौलाना गुलाम अस्करी हाल में होगी।
मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता

