सरफरोशी की तमन्ना” अब हमारे दिल में है” देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है। इन पंक्तियों के साथ इस लेख का आगाज मैं इसलिए कर रहा हूं की अगर सच लिखना गुनाह है तो हम सच्चे पत्रकार यह गुनाह एक नहीं हजार बार करेंगे।
अब देखना है पुलिस के दल्ले सच्चे पत्रकारों पर कितना मुकदमा दर्ज कराएंगे।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हाईकोर्ट की फिक्र लाजमी है लेकिन इस विषय पर पहली चिंता या समाधान के लिए पत्रकार संगठनों को आगे आना चाहिए।पर ऐसा नहीं हुआ।
अब हाईकोर्ट भी पत्रकार संगठनों पर सवाल उठा रहा हैं। ये बात आम इंसान भी जान गया है कि अवैध, असंवैधानिक, असमाजिक, गैर कानूनी और नाजायज़ काम करने के लिए मीडिया का मुखौटा इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे सेक्स रैकेट चलाने में या ब्लैक मेलिंग या फिर गौ तस्कर पत्रकार मैगी की तरह हो गये हैं। दो मिनट में तैयार।
अंबेडकर नगर जिले के मुख्यालय पर कुछ ऐसे तथाकथित पत्रकार हैं जो गौ तस्कर में संलिप्त है पत्रकारिता की ढाल के आगे वह अपने अवैध कामों को अंजाम देते हैं पुलिस भी पुलिस इन पर कोई कार्यवाही नहीं करती। पत्रकारिता को बेचने की खूब कमाई वाली दुकान खुल गयी। जिले में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को इसके कार्ड बेचिए। कार्ड खरीदने वाला संदिग्ध ना सिर्फ पत्रकार बल्कि संगठन का पदाधिकारी/सदस्य बनके पत्रकार नेता भी बन जाता है। ऐसे लोग चकलाघर चलाने से लेकर गौ तस्कर गैर कानूनी काम करने में भय मुक्त हो जाते हैं। ब्लैकमेलिंग से लेकर पुलिस/सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाने के रास्ते खुल जाते हैं।
अधिकारियों से काम करवाने के लिए फर्जी मीडिया गिरोह खूब फल-फूल रहे हैं।
प्रेस के नाम पर काले कारनामों को अंजाम देने के जिम्मेदार सिर्फ पत्रकार संगठन ही नहीं हैं, यू ट्यूब चैनल़ और फर्जी अख़बार (फर्जी का आशय जो अखबार रजिस्टर्ड तो हैं पर नियमित छपते नहीं) भी हैं।
अभी भी नही होश आया तो वो दिन दूर नहीं कि पब्लिक पत्रकार से पूछेगी- आप कौन वाले पत्रकार हैं ! खबर लिखने वाले या चकलाघर चलाने वाले ???? मुझे पता है अवैध काम को अंजाम देने वाले पत्रकारों पर यह खबर 440 वोल्टेज की करंट की तरह लगेंगे, मगर सच तो सच है सच में बड़ी ताकत होती है।
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