शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से यातायात व्यवस्था चरमराई

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नगर में लगने वाले जाम के अहम कारण ई-रिक्शा भी बनते जा रहे हैं। मौजूदा समय में इनकी संख्या एक हजार से ऊपर तक पहुंच गई है। सबसे दिक्कत की बात है कि ई-रिक्शा के संचालन के बाबत किसी तरह की गाइडलाइन अब तक नहीं बनाई जा सकी है। सड़क के दोनों तरफ अलग अलग लेन बनाकर ई-रिक्शा चलते हैं। इससे शहर में और भी जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यातायात पुलिस चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही है। पूरा शहर इस समय जाम से जूझ रहा है। आए दिन भीषण जाम लगने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं। इसमें अन्य कारणों के साथ साथ ई-रिक्शा की भी अहम भूमिका है। इस समय शहर में ई-रिक्शा की संख्या इस कदर बढ़ गई है कि निर्बाध गति से निकला भी दूभर हो गया है। सड़क के दोनों तरफ से ई-रिक्शा लाइन बनाकर चलते हैं। इस तरह से साढ़े सात मीटर की सड़क पर चार लेने में वाहन आते जाते हैं। प्रशासन और यातायात विभाग की तरफ से ई-रिक्शा के संचालन के लिए नई गाइडलाइन बनाने की बात थी, लेकिन अब तक यह बन नहीं सकी है। ट्रैफिक उप निरीक्षक सुधांशु वर्मा ने बताया कि जल्द ही ई-रिक्शा के लिए शहर में रूट तय होना है। हालांकि अभी तक इस पर पूरी तरह से सहमति नहीं बन सकी है। इसलिए अभी सभी पूरे शहर में दौड़ रहे हैं। एक व्यवस्था बनाई जानी थी कि ई-रिक्शा अपने निर्धारित रूट पर ही चलेंगे। यातायात विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि यदि इस पर शीघ्र अमल कर दिया जाता है तो जाम की समस्या काफी कम हो गई होती। नगर के निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष सिंह का कहना है कि नगर में जाम की समस्या को कम करने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक कदम उठाना चाहिए। वह चाहे अतिक्रमण हो या फिर अत्यधिक ई-रिक्शा सबके लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है। जब कि इस पर कदम नहीं उठाया जाता है तब तक जाम की समस्या से जिले के लोग जूझते रहेंगे।

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