माता-पिता के संरक्षण में बालक का सर्वाेत्तम हित: सीडब्ल्यूसी
शान्ती देवी अवधेश वर्मा विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 8707331705
बाराबंकी(एसएम न्युज24टाइम्स)। माता-पिता बालक के नैसर्गिक संरक्षक होते हैं, उनके साथ ही बालक का सर्वांगीण विकास सम्भव है। अतः उनकी देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों को प्राथमिकता के आधार पर माता-पिता की सुपुर्दगी में देना न्यायसंगत व समीचीन होता है। उक्त कथन न्यायालय बाल कल्याण समिति बाराबंकी की तीन सदस्यीय न्यायपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा। राजेश शुक्ला, रचना श्रीवास्तव एवं दीपशिखा श्रीवास्तव की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यदि माता-पिता स्वस्थ एवं सक्षम हैं, तथा वे अपने बच्चे को दूसरे के संरक्षण से अपनी सुपुर्दगी में लेना चाहते हैं। तो बेहतर दवाई, पढ़ाई एवं देखभाल के लिए बालक का सर्वाेत्तम हित माता-पिता के साथ ही होता है। एक मामले में माता-पिता ने जन्म के 3 माह से ही मामा-मामी के साथ रह रहे अपने 10 वर्षीय इकलौते पुत्र को अपने सुपुर्दगी में लेने का प्रार्थना पत्र देते हुए न्यायालय बाल कल्याण समिति बाराबंकी के समक्ष प्रस्तुत किये। माता-पिता ने समिति को बताया कि बालक को चिकित्सा एवं पढ़ाई की जरूरत है, परंतु मामा के यहां बालक इन सबसे वंचित है। मामा पक्ष दवाई-पढ़ाई से सम्बंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नही कर सकें।मामा-मामी ने अपने बयान में बालक को सौंपने की रज़ामंदी भी दिया है। जिसके आधार पर बालक के भावात्मक सन्तुलन की समुचित व्यवस्था के निर्देशों के साथ प्रश्नगत बालक को माता-पिता को नैसर्गिक सरंक्षक मानते हुए उनके संरक्षण में सुपर्दगी का आदेश पारित किया है। बाल कल्याण समिति के इस फैसले को दोनों पक्षों ने सम्मानपूर्वक स्वीकार किया तथा समिति के सभी सदस्यों का आभार भी प्रकट किया।
शान्ती देवी अवधेश वर्मा विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 8707331705

