बाराबंकी। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर नगर के हजाराबाग मुहल्ले में डॉ अम्बरीष अम्बर की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई। जिसमें एक दर्जन कवियों ने काव्यपाठ किया। प्रदीप महाजन के संचालन में कवि ओपी वर्मा ओम ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पढ़ा- ‘भाषा जितनी विश्व मे बोली जातीं आज। हिंदी सबसे भावप्रिय जाने सकल समाज।‘ कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव जीत ने पढ़ा- हिन्दी मे नजाकत है, उर्दू में नफासत है। दोनों दिल मे बसती हैं, तो फिर क्यों सियासत है। इस मौके पर प्रदीप सारंग ने कहा- ‘चातक जस जो जन तकैं, हिन्दी भाषा ओर। आपनि भाषा छाड़ि कै, बहुत मचावैं शोर।। बहुत मचावैं शोर, जरूरी काम करैं ना। ना बोली मा लिखैं, आपसी बात करैं ना। कह सारंग कविराय, बोलियाँ नाहीं घातक। घातक बोली द्रोह, सुनौ हिन्दी के चातक।। संचालक प्रदीप महाजन ने लिखना पढ़ना बोलना, सबमें है आसान। हिंदी भाषा ही बने, भारत की पहचान। अध्यक्षता करते हुए डॉ अम्बरीष अम्बर ने पढ़ा- हिंदी में अंतर्निहित है इतना उत्कर्ष। लिख सकती आकाश पर जय जय भारत वर्ष। अंत में मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ बलराम वर्मा ने अवध भारती संस्थान के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि अवधी बोली भाषा के उन्नयन के लिए किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं। इस मौके पर आँखें फाउंडेशन के अध्यक्ष सदानन्द वर्मा, अवधी अध्ययन केंद्र के उप सचिव अनुपम वर्मा, ग्रीन गैंग के सदस्य रमेश चन्द्र रावत, आकाश वर्मा, आकांक्षा वर्मा, सुनीता देवी, शिक्षामित्र नीता वर्मा, क्रांति वर्मा, उपस्थित रही।
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

