श्रीमद्भागवत कथा सह प्रवचन सुनकर श्रोता भक्त रोजाना भक्त सागर में लगा रहे गोता

शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

मसौली (बाराबंकी) श्रीमद्भागवत कथा सह प्रवचन सुनकर श्रोता भक्त रोजाना भक्त सागर में गोता लगा रहे है। क्षेत्र में भक्ति की बह रही अविरल धारा से वातावरण भी भक्तिमय बना हुआ है। कार्यक्रम के पंचम दिन के अवसर पर कथावाचक रेखा शात्री द्वारा श्रीमद्भागवत में “भगवान का आविर्भाव, यदुवंश का विस्तार, पुतना उद्धार एवं नंद उत्सव आदि का वर्णन किया। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के आविर्भाव का वर्णन करते हुए कहा कि अज्ञान के घोर अंधकार में दिव्य प्रकाश। परिपूर्णता भगवान श्याम सुंदर के शुभागमन के समय सभी ग्रह अपनी उग्रता, वक्रता का परित्याग करके अपने-अपने उच्च स्थानों में स्थित होकर भगवान का अभिनंदन करने में संलग्न हैं।

कल्याणप्रद भाद्रमास, कृष्ण पक्ष की मध्यवर्तिनी अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार और आधी रात का समय देवरूपिणी देवकी के गर्भ से भगवान श्री कृष्णचन्द्र का आविर्भाव हुआ, जैसे पूर्व दिशा में पूर्ण चन्द्रमा उदित हुआ हो। उसी समय वसुदेव जी को अनन्त सूर्य-चन्द्रमा के समान प्रकाश दिखाई दिया और उसी प्रकाश में दिखाई दिया। एक अद्भुत असाधारण बालक जिसके बाल-बाल में, रोम-रोम में ब्रह्मांड रहते हैं, चार भुजा वे चतुर्भुज रूप में चारों पुरुषार्थ अपने हाथ में लेकर जीवों को बांटने के लिए आते हैं। चार आयुध शंख, चक्र, गदा और पद्म कमल-सी उत्फुल्ल-दृष्टि कोई भी बालक पैदा होता है तो उसकी आंखें बन्द होती हैं। खुली नहीं होती लेकिन इसके नेत्र खिले हुए कमल के समान है। नीलवर्ण, पीताम्बरधारी, वक्ष:स्थल पर श्रीवत्सचिह्न, गले में कौस्तुभमणि, वैदूर्यमणि के किरीट और कुण्डल, बाजूबंद और कमर में चमचमाती हुई करधनी। यह तो आश्चर्यों का खजाना है। ऐसा अपूर्व बालक कभी किसी ने कहीं नहीं देखा-सुना। यही भगवान का ‘दिव्य जन्म’ है। वास्तव में भगवान सदा ही जन्म और मरण से रहित हैं। उनके आविर्भाव का नाम ‘जन्म’ है। कथावाचक रूप रेखा शास्त्री ने श्री कृष्ण का जन्मोत्सव के बारे में विस्तारपूर्वक बताया कहा कि द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- ‘मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है?’ कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ “माया’ थी। तथा भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया । इस मौके पर सुरेश नाग संजय मौर्या पकज नाग रवि नाग रमेश मौर्या डा0सत्रोहन लाल वह विश्वकर्मा सोनू जैन अवधराम यादव आदि भक्त मौजूद रहे ।

शान्ती देवी  अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

Don`t copy text!