सीरियाई सेना का एयर डिफ़ेन्स मज़बूत, इस्राईल के मीज़ाईल हमले को किया नाकाम
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
सीरिया की सेना ने राजधानी दमिश्क़ पर ज़ायोनी सेना के मीज़ाईल हमले को नाकाम बना दिया।
न्यूज़ एजेंसी साना के मुताबिक़, सीरियाई सेना के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम ने दमिश्क़ पर फ़ायर हुए कई मीज़ाईलों को हवा में ही तबाह कर दिया। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, ज़ायोनी सेना ने अतिग्रहित गोलान हाइट्स से ये मीज़ाईल मारे थे। कुछ सामाचारिक सूत्रों का कहना है कि इस्राईल फ़ाइटर जेट से ये मीज़ाईल फ़ायर हुए थे।ज़ायोनी सेना का दावा है कि उसके मीज़ाईल हमले का निशाना दमिश्क़ में फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के केन्द्र थे। इस मीज़ाईल हमले के बारे में और ब्योरे का इंतेज़ार है।
अमेरिका ने ईरान को दी नयी धमकी, ईरान ने भी कहा कि NPT से निकलने पर विचार किया जायेगा
ईरान को झुकाने का सपना देखने वाले ख़ुद इतिहास के कूड़ेदान में चले गये

अमेरिका के विदेशमंत्री ने तेहरान विरोधी राग अलापते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दोबारा बहाल किया जायेगा।
माइक पोम्पियो ने “द वाशिंग्टन फ्री बीकन” (The Washington Free Beacon) पत्रिका से साक्षात्कार में कहा कि इस देश के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप की सरकार ने पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बहुलक्ष्यीय प्रयास आरंभ कर दिया है जिसमें ईरान के खिलाफ दोबारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बहाल किया जाना भी शामिल है।
साथ ही उन्होंने कहा कि इस योजना से परमाणु समझौते को अत्याधिक नुकसान पहुंचेगा पर साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि यूरोप यथावत परमाणु समझौते का समर्थन कर रहा है और इस मामले में वह वाशिंग्टन के साथ नहीं है।
अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते से एक पक्षीय और ग़ैर कानूनी रूप से वाशिंग्टन के निकलने की ओर कोई संकेत किये बिना कहा कि ट्रंप आगामी महीनों में राष्ट्रसंघ से ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दोबारा बहाल कराने के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला करने वाले हैं।
इस्लामी गणतंत्र ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके परमाणु मामले को दोबारा सुरक्षा परिषद में भेजा गया तो तेहरान परमाणु हथियार अप्रसार संधि एनपीटी से निकलने पर विचार करेगा।
जानकार हल्कों का मानना है कि एसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की युद्धोन्मादी टोली को इतिहास की सही जानकारी नहीं है क्योंकि अगर सही जानकारी होती तो अमेरिकी विदेशमंत्री इस प्रकार की बात न करते क्योंकि इससे पहले भी ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर चुका है पर वह अमेरिका की वर्चस्वादी नीति के सामने नहीं झुका और विश्व की वर्चस्वादी शक्तियों के पास ईरान को नहीं झुका सकीं तो उन्होंने ईरान के साथ परमाणु समझौता किया।
रोचक बात यह है कि वह लोग ईरान के खिलाफ दोबारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाये जाने की बात कर रहे हैं जो न केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर अमल नहीं करते हैं बल्कि जो लोग सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अमल करने का प्रयास करते हैं उन्हें दंडित करने की धमकी देते हैं।
बहारहाल जानकार हल्कों का कहना है कि ग़लती को दोहराना भी ग़लती है और अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो को अतीत के अनुभवों से पाठ लेकर अतीत की ग़लतियों को दोहराने से परहेज़ करना चाहिये।

