जश्न ए विलादत अमीरुल मोमिनीन पर हुई जगह-जगह महफिले , चरागां कर चला नज़्रोनियाज़ का सिलसिला
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी
दीन से फायदा चाहते हो तो मार्फत ए दीन हासिल करो – मौ. इब्ने अब्बास
इश्के मोहम्मद व ऑल ए मोहम्मद के बगैर मारेफ़त मुमकिन नहीं
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बाराबंकी । जश्न ए विलादत अमीरुल मोमिनीन पर हुई जगह-जगह महफिले । दीन से फायदा चाहते हो तो मार्फत ए दीन हासिल करो । इश्के मोहम्मद व ऑल ए मोहम्मद के बगैर मारेफ़त मुमकिन नहीं । यह बात मौलाना इब्ने अब्बास ने महफ़िल को खि़ताब करते हुए इमाम बाडा़ मीर मासूम अली में कही । उन्होंने यहभी कहा, मारफ़ते परवत्र दिगार चाहिए तो मोहम्मद व आल ए मोहम्मद की मारेफ़त हासिल करो। अली अ. उस जात को कहते हैं जो दिखने में बन्दे जैसा और सिफ़ाअत व कमालात में परवर दिगार जैसा नज़र आए।खिताबत के बाद नज़रानये अकी़दत का सिलसिला शुरू हुआ। नसीर अंसारी ने अपना कलाम पढ़ा – गौर से सुन लो है क्या तेरह रजब, रब की है खास एक अता तेरह रजब । मेरे मौला की विलादत का है दिन , बरकतों की इंतिहा तेरह रजब । अजमल किन्तूरी ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – जहां ने इल्म के उन सह सवारों को कहां देखा, जिहालत की नज़र से बस गुबारे कारवां देखा । अली को जिस किसी ने भी बा अंदाजे़ गुमां देखा , पसे मंजर धुआं देखा सरे मंजर धुआं देखा ।कलीम रिज़वी ने पढ़ा-हम जैसे ख़ताकारों कीमुश्ताक़ है जंनत मिदहत ही ख़ता है तो ख़ता और करेंगे ।सरवर अली रिज़वी करबलाई ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – अजीब शान से की अपनी इब्तेदा तुमने ,नबी के हाथों पे क़ुरआन पढ़ दिया तुमने । एक इंतज़ार था आँखों को बंद थी आंखे , नबी को देखते ही मुस्कुरा दिया तुमने ।मुज़फ़्फ़र इमाम ने पढ़ा – क्या समझे भला दुनियां यह शान ए अबू तालिब काबे में हुआ पैदा सुल्तान ए अबू तालिब । इसके अलावा अदनान रिज़वी, ज़मानत अब्बास , ज़ईम काज़मी,अयान, फ़िरासत अब्बास, मोहम्मद व फैज़ान ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया ।महफ़िल का आग़ाज़ तिलावते कलाम ए पाक से अली मियां रिज़वी ने किया । बानिये महफ़िल ने सभी का शुक़्रिया अदा किया। वहीं बेलहरा हाउस कम्पाउंड स्थित मरहूम बाक़र साहब के यहां भी महफ़िल को आली जनाब मौलाना इब्ने अब्बास साहब ने महफ़िल कोख़िताब किया। मौलाना मो .रज़ा ज़ैदपुरी ,सरवर अली रिज़वी करबलाई , कमर इमाम,मुज़फ्फर इमाम,फिरासत अब्बास , मोहम्मद , ज़ईम काज़मी, गाज़ी इमाम,मोहसिन इमाम व मुस्लिम सल्लमहू नेभी नज़रानये अक़ीदत पेश किया।महफिल का आग़ाज़ सैफ़ हैदर हुसैनी ने तिलावत ए कलाम पाक व कौ़ले मौला मय तफ़्सीर सुनाकर किया ।मौलाना गुलाम अस्करी हाल व करबला सिविल लाइन में भी हुई महफ़िल शबे विलादत पर हुआ चरागां।जनपद के गांव व कस्बों में भी हुई महफिलें ।
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

