केवल वेद ही ऐसा धर्म ग्रंथ है जिसमें दोनों विशेषताएं हैं।

शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

मसौली बाराबंकी । वेद ईश्वरीय ज्ञान है।वेद का उपदेश किसी मत-मजहब पंथ- संप्रदाय विशेष के लिए नहीं अपितु मानव मात्र के लिए है। सनातन का अर्थ होता है ऐसा ज्ञान जो काल गणना मे सबसे पुराना और ज्ञान की दृष्टि से आज भी नूतन हो।इस कसौटी पर केवल वेद ही ऐसा धर्म ग्रंथ है जिसमें दोनों विशेषताएं हैं।

आर्य समाज दशहराबाग के आर्यावर्त साधना सदन मे गत 1 अगस्त से चल रहे ” वेद ज्ञान गंगा प्रवाह ” कार्यक्रम के समापन दिवस पर अपने विचार प्रकट करते हुए वैदिक प्रवक्ता आचार्य सुरेश जोशी ने दुनिया भर मे प्रचलित अन्य मतों की पुस्तकों पर चर्चा करते हुए कहा कि  महाभारत काल आज से 5552 वर्ष पूर्व। महाभारत के बाद पहला मत पारसी मत4500 वर्ष पूर्व।पारसी के बाद यहूदी मत 4000 वर्ष पूर्व। यहूदी के बाद समकालीन महावीर स्वामी का जैन मत व महात्मा बुद्ध का बौद्धमत 2500 वर्ष पूर्व। बौद्ध जैन के बाद आचार्य शंकर का अद्वैत वेदांत 2300 वर्ष पूर्व। आचार्य शंकर के बाद पौराणिक मत 2200 वर्ष पूर्व।पुराण के बाद ईसाई मत 2023 वर्ष । ईसाई के बाद इस्लाम मत और इस्लाम के बाद नानक संप्रदाय 554 वर्ष का है। आचार्य जोशी ने कहा कि हमने जिसे सनातन का मूल वेद कहा।जो कि सत्य सनातन वैदिक धर्म कहलाता है उसकी सही काल गणना आपके सामने रखें उससे पूर्व यह भी बताते चलें कि इस संबंध मे संपूर्ण विश्व के प्रामाणिक दार्शनिक विद्वानों की राय क्या है। अंग्रेज विद्वान मैक्समूलर एवं डॉ मेग्डानल के कथनानुसार वेद ईशा से १४०० वर्ष पूर्व के हैं । डाक्टर जे० कौबी के अनुसार वेद ईशा से ४५०० वर्ष पूर्व के हैं । इतिहास कार अविनाश चंद्र दास के अनुसार वेद ईशा से ५०,००० वर्ष पूर्व के हैं। डाक्टर पावगी के अनुसार वेद २लाख ४० हजार वर्ष पूर्व के हैं। महर्षि अरविन्द घोष, प्रोफेसर मैक्समूलर के आदर्श आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी के अनुसार वेद १अरब ९६ करोड़ ८लाख ५३ हजार १२४ वर्ष पूर्व सृष्टि के आदि से हैं। इस प्रकार समस्त प्रमाणों से सिद्ध है कि काल गणना के हिसाब से वेद और वेद आधारित धर्म ही सनातन का मूल है।
उन्होने ज्ञान की कसौटी पर वेद को प्रमाणित करते हुए कहा कि वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक है जबकि कुरान, बाईबल, आदि मजहबी पुस्तकों में गणित, विज्ञान, खगोल शास्त्र, संगीत, आयुर्वेद, तकनीकी शिक्षा,मानव निर्माण की आधार शिला सोलह संस्कारों की शिक्षाओं का नितांत अभाव है।वेद में ये समस्त आधुनिक व प्राचीनतम विद्याओं का अनुपम संगम है। दर्शन, ब्राह्मण ग्रन्थ, स्मृति ग्रन्थ, महाभारत, बाल्मीकि रामायण व गीता जैसे ग्रंथों की पृष्ठभूमि भी वेदों से ही निकलती है।इस प्रकार ज्ञान की दृष्टि से भी सनातन धर्म का मूल वेद ही हैं।
श्रोताओ को संबोधित करते हुए आचार्य सत्य प्रकाश आर्य ने अपने भजन ” धर्म वैदिक अपनाना है ,सनातन यही पुराना है ” के माध्यम से सत्य सनातन वैदिक पथ पर चलने का आह्वान किया । पंडिता रुक्मणी आर्या ने अपने सुमधुर भजनो से उपस्थित श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम मे सभासद आलोक वर्मा ,आर्य समाज सोमैयानगर के पंडित रमापति अवस्थी , राजीव कुमार अवस्थी , अर्जुन देव, प्रेमचंद, राजेश्वरी सिंह आदि काफी संख्या मे स्त्री -पुरुष उपस्थित थे । कार्यक्रम के अध्यक्ष शांति स्वरूप आर्य ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया । यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

शान्ती देवी  अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

 

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