धर्मशाला में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में जगदगुरु स्वामी रामचंद्राचार्य ने उक्त उद्गार व्यक्त किए
आई एम खान संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बिसौली- बदायूं 8273974747
बिसौली। भगवान विष्णु ने समय समय पर अवतरित होकर धरती से काम क्रोध लोभ रूपी राक्षसों का संहार किया। ऋषि मुनियों का अपमान कर श्रापित द्वारपाल जय विजय को भगवान ने चार अवतार लेकर पुनः बैकुंठ की प्राप्ति कराई। अग्रवाल धर्मशाला में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में जगदगुरु स्वामी रामचंद्राचार्य ने उक्त उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि………….

भगवान विष्णु के जय-विजय नाम के दो द्वारपाल सदैव वैकुंठ के द्वार पर खड़े रहकर श्रीहरि की सेवा करते थे। एक बार सनकादि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ आए। जब सनकादि मुनि द्वार से होकर जाने लगे तो जय-विजय ने हंसी उड़ाते हुए उन्हें बेंत अड़ाकर रोक लिया। क्रोधित होकर सनकादि मुनि ने उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया। क्षमा मांगने पर सनकादि मुनि ने कहा कि तीनों ही जन्म में तुम्हारा अंत स्वयं भगवान श्रीहरि करेंगे।
इस प्रकार तीन जन्मों के बाद तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। पहले जन्म में जय-विजय ने हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का तथा नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। दूसरे जन्म में जय-विजय ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया। इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। तीसरे जन्म में जय-विजय शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान श्रीकृष्ण ने इनका वध किया। कथा से पूर्व स्वामी जी ने वृहद तुलसी पूजन कराया। कथास्थल पर कृष्णकांत अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, विष्णुकांत अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, रविप्रकाश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, रोहित, संजय अग्रवाल, डा. प्रवीन शर्मा, मधु शर्मा, धर्मेंद्र वार्ष्णेय, विमला अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, आदि उपस्थित रहे।
आई एम खान संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बिसौली- बदायूं 8273974747

