पीपल के विशाल वृक्ष पर दबंग लकड़कट्टो ने चलाया आरा गांव में आक्रोश
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी । वन विभाग और पुलिस के संरक्षण मे लकड़कट्टों के हौसले बुलंद हैं । कल दिन- दहाड़े सफदरगंज मे पीपल के विशाल वृक्ष पर दबंग लकड़कट्टो ने आरा चला दिया ।

घटना की शिकायत डी एफ ओ तक पहुंची तब कहीं जाकर पीपल का पेड़ बच सका । उक्त पीपल वृक्ष को क्षेत्रीय जनता पूजन करती थी इस कारण घटना से लोगों मे तीव्र आक्रोश है । पूरे क्षेत्र मे संचालित आरामशीन और लकड़ी की ठेकियों पर बड़े पैमाने मौजूद प्रतिबंधित पेड़ों की लकड़ी इस बात का प्रमाण है कि हरे भरे पेड़ों की कटान धड़ल्ले से चल रही है ।
विवरण के अनुसार कल थाना व वन रेंज सफदरगंज अन्तर्गत रेलवे लाइन के निकट स्थित पीपल के हरे भरे विशाल प्रतिबंधित पेड़ को रसौली निवासी लकड़ी ठेकेदार लकड़कट्टो को ले जाकर कटाने लगा । ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय थाना व वन रेंज सफदरगंज पर दी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। ग्रामीणों की सूचना पर भाजपा किसान मोर्चा के जिला महामंत्री तथा पर्यावरण समिति के सदस्य आशीष कुमार वर्मा ने डी एफ ओ को घटना से अवगत कराया तब कहीं जाकर पीपल के पेड़ को काटने से बचाया जा सका ।
इसके पूर्व ग्राम चमन शाह किठूरी , फत्तापुरवा , डलई पुरवा मजरे रूदलापुर , खिदरापुर मजरे सदेवां थाना सफदरगंज वन रेंज रामनगर तहसील सिरौली गौसपुर मे गत 23 दिसम्बर से 26 दिसम्बर रातों दिन दो दर्जन से अधिक हरे भरे पेड़ बगैर परमिट काट कर लकड़कट्टे उठा ले गये । ग्राम फत्तापुरवा मे पुरुषोत्तम पंडित की बाग से आम के चार पेड़ काट कर लकड़कट्टों ने पेड़ के ठूठ गीली मिट्टी का लेपन कर दिया तथा ठूठों को धान के पयाल से ढक दिया ।इसी तरह ग्राम डलई पुरवा मजरे रूदलापुर निवासी शंकर पाल की बाग से तीन आम के पेड़ तथा चमन शाह किठूरी निवासी हसीब फकीर की बाग से दो पेड़ आम ,दो पेंड नीम, एक पेड़ गुलर,एक पेड़ जामुन ,एक पेड़ बड़हल और एक पेड़ लसोहर को काट कर लकड़कट्टे उठा ले गये । इसके अतिरिक्त ग्राम खिदरापुर मजरे सदेवां निवासी राम सरन रावत की बाग से हरे भरे नौ आम के पेड़ बिना किसी परमिट काट डाले गये । इन सभी स्थानों पर काटे गये पेड़ो के ठूंठ अभी भी लगे हुए हैं ।
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पेड़ों की अवैध कटान में लकड़ी ठेकेदार प्रतिबंधित पेड़ों की कटान पर पुलिस को 40 % एवं वन विभाग को 30% तथा छूट वाले पेड़ो की कटान पर 10% धनराशि पुलिस को इमानदारी से पहुंचा देते हैं । इसी वजह से लकड़कट्टों के विरूद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नही होती है ।

