लंदन और वाशिंग्टन कोरोना से संघर्ष में चीन के योगदान को नकारने पर तुले लेकिन दक्षिणी कोरिया का अनुभव तो कुछ और कह रहा है!

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

अमरीका और ब्रिटेन ने एक नियोजित रणनीति के तहत चीन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है और दोनों ही देश कोशिश कर रहे हैं कि कोरोना वायरस के मामले में चीन को शक के दायरे में खड़ा कर दें।
ब्रिटिश प्रचारिक संस्था बीबीसी ने प्रोपैगंडा शुरू कर दिया है कि स्पेन को चीन से मिलने वाली कोरोना टेस्ट किट भरोसे लायक़ नहीं है इसी तरह हालैंड और अन्य यूरोपीय देशों ने चीन से जो मास्क ख़रीदे हैं वह अच्छे नहीं हैं।
चीन ने यूरोपीय देशों से आग्रह किया था कि वह केवल उन चीनी कंपनियों से सामान ख़रीदें जिन्हें उद्योग व स्वास्थ्य मंत्रालय से लाइसेंस मिला है और जो निर्धारित नियमों का पालन करती हैं मगर चीनी सरकार की इस चेतावनी पर यूरोपीय देशों ने ध्यान नहीं दिया। स्पेन ने कुछ एसी चीनी कंपनियों से चिकित्सा सामग्री ख़रीदी जिनके पास चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय का लाइसेंस नहीं था।
दूसरी ओर अमरीकी इंटैलीजेन्स एजेंसियों की ओर से आरोप लगा दिया गया कि चीन ने अपने यहां कोरोना से होने वाले संक्रमण और मौतों के आंकड़ों के बारे में ग़लत सूचनाएं दी हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कई बार अपनी प्रेस कान्फ़्रेन्स में यही आरोप दोहराया।
चीन इन आरोपों को ख़ारिज करता है जबकि पश्चिमी देशों का यह हाल है कि विरोधाभासी हरकतें कर रहे हैं। यही देश दक्षिणी कोरिया की तारीफ़ करते नहीं थकते कि उसने कोरोना वायरस को कंट्रोल करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है जहां संक्रमितों में से 2 प्रतिशत से भी कम की मौत हुई। इस सरकार ने उन लोगों का भी टेस्ट किया जिनके बारे में तनिक भी आशंका थी कि वह कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं।
दक्षिणी कोरिया की बात की जाए तो उसने शुरू में ही चीन से बहुत बड़े पैमाने पर सहायता हासिल की। सवाल यह है कि पश्चिमी देश फिर क्यों चीन पर टिप्पणी कर रहे हैं और दक्षिणी कोरिया के बारे में किसी प्रकार की शंका ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं?
ब्रिटेन और अमरीका तो चीन की आलोचना कर रहे हैं उस पर आरोप  लगा रहे हैं मगर अन्य यूरोपीय देशों ने इस मामले में ख़ामोश रहना उचित समझा है, इतना ही नहीं यह देश चीनी तकनीक के अनुसार काम कर रहे हैं। जर्मनी ने दक्षिणी कोरिया की शैली पर काम किया जो दरअस्ल चीन की रणनीति थी यानी हर दिन बहुत बड़ी संख्या में लोगों का टेस्ट किया गया। फ़्रास की सरकार लाक डाउन समाप्त होने के बाद अपने नागरिकों को चीनियों की तरह मास्क पहनने का निर्देश देने पर विचार कर रही है।

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