आर्य समाज मन्दिर मे आयोजित महर्षि दयानन्द सरस्वती के दो सौवें जन्म जयन्ती समारोह…
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता
मसौली बाराबंकी । मानव जाति के प्रकाश स्तम्भों मे महर्षि दयानंद का स्थान चिरंतन, स्थायी , अक्षुण्ण और सार्वदेशिक है । उनको यह गौरव उनकी दिव्य और विश्वविहित चिन्तन के महान आदर्शों के कारण सदैव प्राप्त रहेगा ।
स्थानीय आर्य समाज मन्दिर मे आयोजित महर्षि दयानन्द सरस्वती के दो सौवें जन्म जयन्ती समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम मे यज्ञ के पश्चात उक्त विचार प्रकट करते हुए आचार्य सत्य प्रकाश आर्य ने कहा कि उस कालखंड मे भारत की चेतना मूर्छित हो चुकी थी । समाज मे अविद्या, पाखंड, रूढ़िवाद, अंधविश्वास आदि विविध सामाजिक कुरीतियों के कारण भारतीय समाज दिग्भ्रमित था । देश दासता की बेड़ियों मे आबद्ध था ऐसे मे युगप्रवर्तक दयानन्द का प्रादुर्भाव हुआ था ।
उन्होने कहा कि महर्षि दयानन्द ने आर्य समाज की स्थापना की और वेदों की ओर लौटो का नारा दिया । दयानन्द ने स्त्री शिक्षा , छुआछूत उन्मूलन के लिए सतत संघर्ष किया ।
इस अवसर पर समरसता तहरी भोज का आयोजन भी किया गया । कार्यक्रम मे आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के अंतरंग सदस्य डा आर एन गुप्त, अरविंद कुमार सिंह एडवोकेट, दिनेश गुप्त, शांति स्वरूप आर्य, राम चन्द्र अग्रवाल, ओम प्रकाश आर्य, शिवकांती आर्या आदि उपस्थित थे । आर्य समाज के मंत्री गुरू नारायण श्रीवास्तव ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

