सेवा नियुक्त पुलिस कर्मियों की आवाज बुलंद कर रहे अकील चौधरी
सेवा नियुक्त पुलिस कर्मियों की आवाज बुलंद कर रहे अकील चौधरी
लखनऊ उत्तर प्रदेश। सेवानिवयुक्त पुलिस कर्मचारी वेलफेयर संस्था के लखनऊ मंडल अध्यक्ष अकील चौधरी ने प्रदेश के उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेज कर पुलिस कर्मियों के लिए निम्नलिखित मांगों को लेकर प्रार्थना पत्र दिया है जो इस प्रकार हैं
1. सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने स्थानीय थाने पर जाता है तो स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा उनको सम्मान नहीं दिया जाता है और न ही उसकी समस्या सुनी जाती है। जिस कारण पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं देने के बाद भी इस तरह का व्यवहार होने से अपने आप करू हतुत्साहित ममहसूस करता है। पुलिस प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए कि यदि सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर जब भी स्थानीय थोन पर जाता है तो उसकी शिकायत का समाधान करने के लिए वरीयता देनी चाहिए।
2. सेवारत या सेवानिवृत्त कम्रचारी के वेलफेयर के नाम पर अधिकारियो एवं राजनैतिक नेताओ द्वारा मंचासीन हो कर बढ़चढ़ कर वादे किये जाते हैं। लेकिन आज भी पुलिस कर्मचारियो के रहने के लिये एक कमरे की व्यवस्था केन्द्र सरकार/उ० प्रदेश सरकार नहीं कर पा रही है। अभी भी पुराने जमाने की तरह छप्परनुमा बैरिक में रहने के लिये मजबूर किया जाता है। जिससे कोई विशेष सुविधा नहीं होती है। और आज भी कई थाने व चौकियँ छप्पर व टीन के नीचे चल रही हैं जिसमें आवश्यक जरूरत की चीजें जैसे फाल्वर, बिजली तक उपलब्ध नहीं है।
3. सेवानिवृत्ति एवं सेवारत कम्रचारियो के विरूद्ध आज भी झूठी शिकायत मिलने पर विभागीय कार्यवाही, मुकदमा पंजीकृत कर प्रताड़ित कर आत्महत्या करने के लिये मजबूर किया जाता है। या तो आईपीएस अधिकारियो के कहने में चलो या उत्पीड़न सहन करते रहते या आत्महत्या करके मर जाअओ
4. पुलिस आज भी अंग्रेजों के बनाये गये पुलिस रेगुलेशन 1861 की पूर्ण रूप से शिकार हो रही है और उसका जमकर उत्पीड़न हो रहा है जबकि वर्ष 2005 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस रेगुलेशन 2005 लागू करने हेतु आदेश किया गया है लेकिन फिर भी केन्द्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मार्डन पुलिस एक्ट 2005 मा० प्रकाश सिंह पूर्व डीजीपी द्वारा याचिका दायर कर आदेश पारित कराया है लेकिन अभी तक लागू नहीं किया गया। पुलिस रेगूलेशन 1861 की कर्मचारियो से गुलामी करायी जा रही है।
5. पुलिस विभाग छोटे कर्मचारियो से 16-18 घण्टों तक काम लिया जाता है ओर फिर भी उन्हें मांगने पर छुट्टी नहीं मिलती है। चाहे सन्डे, सेकेन्ड सटर-डे या त्योहार इसका कोई अलग से भुगतान नहीं किया जाता है। उ०प्र० सरकार द्वारा कम्पनी के कर्मचारियो के लिये 8 घण्टे के काम का निर्धारण किया गया है लेकिन पुलिस के कर्मचारियो के लिये काम के घण्टों का कोई निर्धारण नहीं किया गया। अन्य विभाग के कर्मचारियो का जैसे रविवार, द्वितीय शनिवार, राजपत्रित अवकाश व अराजपत्रित अवकाश दिया जाता है, लेकिन साल में पुलिस कर्मियो से 108 दिन अतिरिक्त कार्य लिये जाने के बाद भी कोई वेतन भत्ता नहीं दिया जाता है।
6. पुलिस को छोटे-छोटे मामले में अकारण अधिकारियों द्वारा दण्ड देकर मनोबल नीचा किया जाता है जिससे पुलिस का कार्य करने में रूचि नहीं लेते हैं। आज भी पुलिस का सिपाही 1900 गेड वेतन लेने के लिये मजबूर है जो सफाईकर्मी के वेतन के बराबर है तथा कई बार मा० उच्च न्यायालय का आदेश होने के बावजूद भी 4200 ग्रेड पे न देकर जबरदस्ती 2800 गे्रड पे का वेतन दिया जा रहा है जो सभी पुलिस कर्मचारी उक्त परेशानी से पीड़ित हैं।
7. थाने व पुलिस लाईन पर पुलिस कर्मियों की मीटिंग केवल दिखावा करने के लिये किया जाता है पुलिस विभाग में एकता बिल्कुल खत्म सी हो गयी है। जिसमें आम जन मानस से पुलिस का विश्वास सा उठता जा रहा है जिससे आयेदिन रोड जाम, पथराव जनता का काम रह गया है।
8. सेवानिवृत्ति होने के बाद करीब 80 वर्ष की आयु के ऊपर करीब 90 प्रतिशत लोग की मृत्यु हो जाती है जिस कारण पेंशन में 80 वर्ष की आयु के बाद 20 प्रतिशत की बढ़त्तरी का लाभ नहीं मिल पाताा है। इस सम्बन्ध में मुझे यह कहना है कि प्रत्येक 5 वर्ष पर 10 प्रतिशत की बढ़ओत्तरी की जाये।
9. निश्चित रूप से मेरा कहना है कि अधिकारियों द्वारा अपने लाभ के लिए कर्मचारियों के दण्डित किया जाता है। हर थाने के कर्मी को बुलाकर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रत्येक माह सम्मेलन किया जाता है लेकिन किसी भी कर्मचारी की समस्या का उचित निदान नहीं किया जाता है जबकि थाना दिवस में आम जनता की सुनवाई करके पुलिस कर्मचारियों को हिदायत दी जाती है अगर कोई मामला लम्बित रह जाता है तो उस थाने के सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी को दण्डित किया जाता है और आर्थिक लाभ लेकर दण्ड से मुक्त कर दिया जाता है।
10. मेरे द्वारा चुनाव में वोट देने के सम्बन्ध में चुनाव आयोग दिल्ली एंव चुनाव आयोग लखनऊ को प्रार्थनापत्र देकर जनसूचना अधिकार से मांगा गया था जिस पर मुझे सूचना प्राप्त करायी गयी थी कि बैलट पेपर की व्यवस्था लागू की गई है जबकि मेरे कार्यरत कर्मचारी डियूटी के बाहर चले जाने के कारण 20 प्रतिशत से ऊपर अपने मतदान का प्रयोग नहीं कर पाते हैं जिसकी व्यवस्था पूर्ण रूप से 100 प्रतिशत लागू करने का आदेश पारित किया जाये।
11. आई०पी०एस० अधिकारियों के लिए उत्तर प्रदेश में या भारत में कोई बार्डर स्कीम लागू नहीं है वो चाहे या अनचाहे अपने गृह जनपद में नियुक्त रह सकते हैं लेकिन अराजपत्रित पुलिस कम्रचारी बार्डर स्कीम के तहत अपने गृह जनपद के नजदीक के जिले में भी नहीं रह सकते जिसके कारण आई०पी०एस० अधिकारियों द्वारा बार्डर स्कीम लागू करवाकर छोटे कर्मचारीगण को प्रताड़ित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
12. जैसे की सभी पुराने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देय है वैसे ही नये कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम लागू न होने के कारण काफी हताश व हतुत्साहित महसूस करते हैं जिससे कार्य करने में इनका मल नहीं लगता है और उनकी जिन्दगी का बुढ़ापा भी सुरक्षित नहीं है।

