यमन का हेल्थ सिस्टम जंग से ध्वस्त हो चुका है लेकिन ब्रिटेन अब भी यमन पर बमबारी में सऊदी अरब की मदद कर रहा है, यहां तक कि कोरोना महामारी के दौर में भी!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
पांच साल से अधिक समय से जारी जंग ने यमन को बेहद गंभीर मानवीय संकट में उलझा दिया है। इस देश का हेल्थ सिस्टम तबाह हो चुका है और बड़ी संख्या में लोग भुखमरी का शिकार हैं मगर सऊदी अरब के लिए ब्रिटेन के हथियारों की सप्लाई बंद नहीं हुई है।रशा टुडे की वेबसाइट पर डबलिन स्थित आइरिश लेखिका डैनिएले रयान का एक लेख छपा है जिसमें कहा गया है कि यमन में सऊदी अरब की बमबारी के मिशन को जारी रखने और मदद पहुंचाने में ब्रिटेन का रोल पहले भी रहा है लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इस ग़ैर इंसानी मदद ने हालात की गंभीरता बढ़ा दी है।यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र की मानवीय मामलों की कोआर्डिनेटर लिज़ ग्रांडे ने चेतावनी दी है कि देश में 50 प्रतिशत से भी कम चिकित्सा केन्द्र काम कर रहे है हर तरफ़ अभाव ही अभाव नज़र आता है।
इस बीच ब्रिटेन की हथियार कंपनी बीएई सिस्टम्ज़ ने कोरोना महामारी के संकट को गोल्डन अवसर में बदलते हुए ब्रिटेन के लिए फ़ेस शील्ड और वेंटीलेटर बनाना शुरू कर दिया मगर इस कंपनी के जहाज़ हथियारों की खेप लेकर लगातार सऊदी अरब के ताएफ़ में किंग फ़हद एयरबेस पर उतर रहे हैं। यहां पर तैनात ब्रितानी टाइफ़ून यमन पर बमबारी में भी हिस्सा लेते हैं।

जब ब्रिटेन के रक्षा मंत्री से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कोई भी जवाब देने से इंकार कर दिया। गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बीएई ने पिछले पांच साल में सऊदी अरब को 15 अरब पौंड के हथियार बेचे हैं।
एक एक्सपर्ट ने कहा कि यमन युद्ध इस वजह से जारी रह पाया कि हथियार बनाने वाली कंपनियों और कुछ पश्चिमी सरकारों ने इसका समर्थन नहीं रोका। इस समय ब्रिटिश सेना अपने देश में तो टेम्परेरी हास्पिटल बनाने में व्यस्त है और कोरोना वायरस की महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ़्रंटलाइन पर डटी हुई है लेकिन यमन में यही सेना मौत बरसाने के सऊदी अरब के मिशन का हिस्सा बनी हुई है।
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया कि 2018 में 85 हज़ार यमनी बच्चे कुपोषण का शिकार हो गए मगर कहीं भी यह इशारा नहीं किया कि यमन युद्ध में ब्रिटेन का क्या रोल है।
स्रोतः रशा टुडे

