सीरिया पर क्यों तेज़ हो गए हैं इस्राईल के हमले? बार बार क्यों नाकाम हो रहा है इस्राईली मिशन? इसलिए जवाबी हमला नहीं कर रहा है सीरिया!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
हालिया दिनों में सीरिया पर इस्राईल के हमलों में काफ़ी तेज़ी आ गई है। शुक्रवार को भी इस्राईली विमानों ने हुम्स में सीरियाई सेना के ठिकाने पर राकेट फ़ायर किया जबकि गुरुवार की शाम गोलान हाइट्स के इलाक़े से इस्राईली हेलीकाप्टरों ने सीरिया के सैनिक ठिकानों को निशाना बनाया। इस्राईली हमलों में आने वाली तेज़ी के कई कारण हैं इस्राईली कोशिश है कि ईरान, सीरिया और हिज़्बुल्लाह को उकसाया जाए ताकि वह इस्राईल के भीतर हमले करें। इस तरह अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू को युद्ध शुरू करने का बहाना मिल जाएगा।नेतनयाहू इन हमलों की मदद से ख़ुद को गंभीर कानूनी कार्यवाही से बचा रहे हैं और इस्राईल में फैले राजनैतिक संकट से लोगों का ध्यान हटाना चाहते हैं।इस्राईल चाहता है कि हिज़्बुल्लाह और ईरान पर दबाव बनाए कि वह सीरिया में अपनी सैनिक उपस्थिति मज़बूत करना बंद कर दें ख़ास तौर पर इस समय जब ईरान कोरोना वायरस की महामारी से लड़ रहा है और लेबनान में अमरीका की साज़िश के चलते गृह युद्ध की आशंका पैदा हो गई है।
इन हमलों से सीरिया को उलझाने की कोशिश की जा रही है ताकि सीरियाई सेना इदलिब के इलाक़े और गैस व तेल से समृद्ध पूर्वी फ़ुरात के इलाक़े को वापस लेने के लिए आप्रेशन न शुरू कर सके। इन हालात में सीरिया के पुनरनिर्माण की प्रक्रिया को भी टालने में मदद मिलेगी।
इस्राईल की यह बचकाना सोच है कि ईरान, सीरिया या हिज़्बुल्लाह उसकी उत्तेजक कार्यवाहियों के झांसे में आकर इस जाल में फंसेंगे और उस युद्ध में कूद पड़ेंगे जिसे इस्राईल और अमरीका शुरू करना चाहते हैं।इस्राईल ने सीरिया में ईरान और हिज़्बुल्लाह की उपस्थिति को कमज़ोर करने के लिए 300 से अधिक हमले किए मगर वह हालात को अपने पक्ष में नहीं मोड़ सका।यह भी तय है कि ईरान, सीरिया और हिज़्बुल्लाह का एलायंस इस्राईली हमलों का जवाब ज़रूर देगा लेकिन इसके लिए वह उचित समय और जगह का चयन करेगा। अगर जवाबी हमला शुरू हो गया तो इस्राईल को रोज़ाना कम से कम 2000 मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ेगा। लेबनान की सीमा पर लगी कंटीले तारों की बाड़ तीन जगह से कट गई तो पूरे इस्राईल में हड़कंप मच गया और नज़दीक ही नज़र आने वाली प्लास्टिक से इस्राईली इतना डर गए कि विशेषज्ञों की पूरी टीम बुलानी पड़ी ताकि यदि बम रखा गया हो तो उसे निष्क्रय किया जा सके।
ईरान और हिज़्बुल्लाह के एलायंस का संदेश साफ़ है कि जब लड़ाई होगी तो केवल जवाबी मिसाइल हमले नहीं होंगे बल्कि इस्राईली क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में ईरान और हिज़्बुल्लाह के जवान घुसेंगे और इन इलाक़ों को आज़ाद भी करवाएंगे। सीरिया पर यह हमले इसलिए हो रहे हैं कि उसने बहुत बड़ी साज़िश को नाकाम बनाते हुए अपने 80 प्रतिशत से अधिक इलाक़ों को विदेशों द्वारा समर्थित चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करवा लिया।
अतीत में सीरिया, इरारक़ और मिस्र का एलायंस था जो पूरे अरब जगत पर छाया रहता था अब एक बार फिर इस एलायंस को अपनी पुरानी जगह हासिल हो रही है और इसी डर ने इस्राईलियों को पागल कर दिया है। सीरिया बहुत भयानक जंगों और साज़िशों का सामना कर चुका है तो इस्राईल के यह मिसाइल हमले उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे।
अब्दुल बारी अतवान अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

