जैदपुर मे सात मुहर्रम को ज़ुलजनाह और अलम की ज़ियारत की मख़्सूस मजलिस हुई । जिसमें भारी संख्या में आस पास के अज़ादारो और ज़ायरीन ने शिरकत की ।
अवधेश कुमार वर्मा
जैदपुर बाराबंकी। इमामबाड़ा सरकारें हुसैनी पूरब तरफ में सात मुहर्रम को ज़ुलजनाह और अलम की ज़ियारत की मख़्सूस मजलिस हुई । जिसमें भारी संख्या में आस पास के अज़ादारो और ज़ायरीन ने शिरकत की ।
मजलिस को मौलाना मुराद रज़ा साहब ने खिताब फरमाया। मौलाना ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लश्कर के अलमदार हजरत अब्बास के फज़ाएल और उनकी इमाम हुसैन के लिए इताअत और वफादारी के फज़ाएल बयान करते हुए कहा की हज़रत अब्बास इमाम हुसैन के लश्कर के अलमदार थे जो प्यासे बच्चों के लिए फुरात से पानी लाते हुए शहीद कर दिये गये ।
इसी क्रम में आठ मोहर्रम की रात दो बजे वक्फ इमामबाड़ा गढ़ी जदीद तालुकदार जैदपुर में कर्बला ईराक से 150 वर्ष पूर्व लाए गये मोजिज़ाई बड़े अलम की ज़ियारत कराई जायेगी । जिस मजलिस को मौलाना क़मर अब्बास ख़ान साहब खिताब फरमायेंगे। मजलिस में क्षेत्र के सभी जायरीन हज़ारों की संख्या में ज़ियारत करने के लिए आते हैं और अपनी मन्नतें और दुआएं मांगते हैं ।

