गरीबों का खून पीने वाली पुलिस का घिनौना चेहरा बेनकाब, 25 हजार की घूस लेते रिश्वतखोर दरोगा रंगे हाथ गिरफ्तार

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

वर्दी का सौदा!

बाराबंकी।जिस पुलिस को गरीब, मजबूर और पीड़ित की ढाल बनना था, वही पुलिस आज उनके खून-पसीने की कमाई को नोचने में जुटी है। कानून की रखवाली करने वाली वर्दी जब दलाली और सौदेबाज़ी पर उतर आए, तो इंसाफ सिर्फ काग़ज़ों में सिमट कर रह जाता है। बदोसराय थाने में तैनात प्रमोटी दरोगा सुरेश कुमार इसका जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसे एंटी करप्शन टीम ने 25 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
मामला ग्राम खलसापुर का है, जहां हुई मारपीट की घटना में एक महिला व युवक का नाम मुकदमे से हटाने के बदले दरोगा ने अभियुक्त के चचेरे भाई से सीधे 50 हजार रुपये की मांग की। गरीब की मजबूरी को अपनी कमाई का जरिया बनाकर, कानून के नाम पर खुलेआम सौदा तय किया गया। दलाली की भूमिका निभा रहा अभियोजन कार्यालय में संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अशफाक, इस भ्रष्ट तंत्र की कड़ी बना।
नगर कोतवाली क्षेत्र के पलहरी ओवरब्रिज के पास जैसे ही 25 हजार रुपये की पहली किश्त दी जा रही थी, तभी एंटी करप्शन अयोध्या की टीम ने शिकंजा कस दिया। रिश्वतखोर दरोगा और उसका बिचौलिया दोनों रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिए गए। इसके बाद टीम दोनों को सफदरगंज थाने ले जाकर पूछताछ और कार्रवाई में जुट गई।
इस गिरफ्तारी से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, लेकिन सवाल अब भी जिंदा है, ऐसे कितने गरीब होंगे, जिनसे हर दिन इंसाफ बेचकर पुलिस उनकी जेब और उम्मीदें दोनों लूट रही है? यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम पर तमाचा है, जहां वर्दी गरीबों का खून पीने का औजार बन चुकी है। अब जरूरत है कि ऐसे भ्रष्ट चेहरों को सख्त सजा मिले, ताकि कानून फिर से गरीब की उम्मीद बन सके, सौदे की चीज़

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