वृन्दावन से पधारे कथा व्यास आचार्य ने कहा हमारे असत्य बोलने से किसी के प्राण बचते हैं तो वह पाप नहीं होता
मुकीम अहमद अंसारी
बिसौली,बदायूं। क्षेत्र के गांव मुसियानगला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृन्दावन से पधारे कथा व्यास आचार्य कृष्ण कार्तिकेय “बृजानुरागी” ने भागवत कथा के चौथे दिन धर्म और नीति के व्याख्या करते हुए कहा कि हमें सत्य बोलना चाहिए यह धर्म बताता है किंतु हमें कब और कहां सत्य बोलना चाहिए यह नीति बताती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक कसाई गाय के पीछे दौड़ रहा था वहां रास्ते में एक महात्मा बैठे थे उसने गाय के आने के बारे में महात्मा से पूछा तो महात्मा असमंजस में पड़ गए उन्होंने सोचा कि सत्य बोलूं तो गाय की हत्या हो जाएगी और असत्य बोलूं तो पाप लगेगा किंतु अंत में उन्होंने नीति का सहारा लिया और कसाई को गाय के आने के बारे में गलत दिशा बता दी, जिसके कारण गाय के प्राण बच गए। नीति बताती है कि हमारे असत्य बोलने से किसी के प्राण बचते हैं तो वह पाप नहीं होता। अतः धर्म और नीति एक दूसरे के पूरक हैं नीति हमें जीवन जीने की शैली सिखाती है, नीति व्यक्ति को सदमार्ग पर चलना सिखाती है, नीति हमें कब और कहाँ क्या बोलना चाहिए बताती है। नीति धर्म की पत्नी है इसीलिए धर्म के बिना नीति अधूरी है और नीति के बिना धर्म अधूरा है। परीक्षित बने ग्राम प्रधान पति धर्मेंद्र मिश्रा ने श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर लोगों को बधाइयां देते हुए उपहार दिये और व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर गांव के वरिष्ठ जनों महिलाओं और दूरदराज के गांव से आये लोगों ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। संचालन मोहित शंखधार ने किया।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

