अबूतालिब ना होते तो इस्लाम का नाम लेने वाला कोई ना होता: मौलाना शहंशाह
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
बाराबंकी। लाइन पुरवा स्थित स्व अली शब्बर के अजाखाने मे दस दिनो तक चलने वाली अशराये मजलिस को मौलाना शहंशाह मिर्जापुरी ने खिताब करते हुए कहा की हजरत अबूतालिब का दूसरा नाम इस्लाम है क्यूँकि अगर अबूतालिब ना होते तो इस्लाम का नाम लेने वाला कोई नही होता। कर्बला मे सबसे ज्यादा खून अबूतालिब का बहाया गया। मजलिस के दौरान सोशल डिस्टेसिंग का खास ख्याल रखा गया मजलिस मे आने वाले अजादारो को लिये सेनेटाईज किया गया। मौलाना शहंशाह मिर्जापुरी ने आगे कहा की मौला अली ने रसूले खुदा के बिस्तर पर सो कर अल्लाह के नबी को बचाया। मौला अली ने हर जगह रसूले खुदा की मदद करते हुवे कई जंगों को भी जीता और इस्लाम की हिफाजत मे पुरी जिन्दगी लगा दी है। मौलाना ने आगे कहा की अली की तरह इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के खातिर अपना पुरा घर-बार राहे खुदा मे लुटा कर इस्लाम को कयामत तक बचा लिया। अन्त मे मौलाना ने कर्बला के शहीदों के दर्दनाक मसायब बयान किये जिसे सुनकर अजादार दहाड़े मारकर रोने लगे। मजलिस से पूर्व कशिश संडेलवी, मुजफ्फर इमाम, शबी आब्दी जफर अब्दी, ने नजरनए अकीदत पेश किया।
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

