सगीर अहमद का निधन समाजवादी युग का अवसान

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवाद के योद्धा, वरिष्ठ समाजवादी चिंतक सगीर अहमद अब हमारे बीच नही रहे। उनका 86 वर्ष की उम्र में रविवार को सुबह 5 बजे बरेली के निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह बीते दो-तीन दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार नमाज ए जनाजा शाम पांच बजे जनपद बदायूँ के कस्बा सहसवान में उनके पैतृक कब्रिस्तान में किया गया। बता दें कि सगीर अहमद का जन्म 4 दिसंबर 1934 को जनपद बदायूँ के सहसवान में हुआ। उनका परिवार लंबे समय तक राजनीतिक परिवेश में रहा। साफ सुथरी छवि के चलते राजनीति के लिए 1953 में उन्नाव के सम्मेलन में यंग सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हुए। उनका जन्म भारतीय राजनीति के ऐसे सुनहरे काल मे हुआ जब कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई। सगीर अहमद के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने बताया कि वह समाजवादी संत परम्परा के मूर्धन्य विभूति थे। गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य थे। धर्मनिरपेक्ष राजनेता थे। सादगी पसंद इंसान थे। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे गरीबी, अशिक्षा, असमानता के खिलाफ लड़ते बीता। उन्होने अपना पूरा जीवन समाजवादी मूल्यों और विचारधारा के प्रति सत्य निष्ठा संग निर्वहन करते व्यतीत किया। ईमानदारी उनका सबसे बड़ा आभूषण था। सगीर अहमद भारत, पाकिस्तान और बंग्लादेश का महासंघ बनाओं मुहिम की पक्षधर थे। बाराबंकी से उनका बेहद गहरा रिश्ता था। गांधी जयन्ती के कार्यक्रम में उनकी विशेष रूचि रहती थी। सही मायने में वह स्व. चन्द्रशेखर जी के वैचारिक उत्तराधिकारी भी थे। उनका रहन-सहन, बोली-विचार, खाना-पान सब समाजवादी था। वे क्रिकेट और अंग्रेजी के सख्त विरोधी थे। सगीर साहब ने राजनीति को कभी अपनी निजी सम्पदा, अर्जन और विस्तार का साधन नहीं समझा। उन्होने इसे जनसेवा का माध्यम माना के कार्य किया। सगीर अहमद की ईमानदारी और कर्तव्य परायणता वर्तमान समय में सभी दलों के जनप्रतिनिधियों के लिए नजीर है और चिरकाल तक रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

 

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

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