मक़्सदे खुदा पर बाक़ी रहने वाले सर तन में जुदाई हो जाने पर भी ज़िन्दा रहते हैं – मौलाना सै0 मो0 दानिश नक़वी
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
जब उम्मत बुजदिली का शिकार हो जाये तो शुजाअते अली बयान करो
सुकून चाहिये तो जिन्दगी देने वाले से राबेता ढूंढो, ईमान को भी अली की ज़रूरत है
बाराबंकी । मक़्सदे खुदा पर बाक़ी रहने वाले सर तन में जुदाई हो जाने पर भी ज़िन्दा रहते हैं । यह बात कर्बला सिविल लाइन में मज्लिसे छमाही बराए ईसाले सवाब मरहूमा नाहीद फातिमा बिन्ते मो0हुसैन आब्दी को खिताब करते हुये मौलाना सै0 मो0 दानिश नक़वीने कही।उन्होने ये भी कहा कि जब उम्मत बुजदिली का शिकार हो जाये तो शुजाअते अली बयान करो । सुकून चाहिये तो जिन्दगी देने वाले से राबेता ढूंढो , ईमान को भी अली की ज़रूरत है ।अली की आल से मोहब्बत ही ज़िन्दगी है ।इताअत गुज़ार ही ज़िन्दा होते है ।जो इताअत नहीं करते वही मुर्दा होते हैं ।उन्होने ये भी कहा जिन्हें अपने रब पर भरोसा होता है वो कभी खौफ़ ज़दा नहीं होते ।आखिर में कर्बला वालों के मसायब पेश किये जिसे सुनकर सभी रोने लगे ।मजलिस से पहले डा 0रज़ा मौरान्वी ने पढ़ा – हर तरफ़ मदहा सराई की हवा है क्या है, मिदहते फातिमा रूहों की गिज़ा है क्या है? जामिन फतेहपुरी ने पढ़ा – हमारे पीछे भी दुश्मन तमाम रहते है , हिफाज़तों के मगर इन्तेजाम रहते हैं।अजमल किन्तूरी ने पढ़ा – किसी मक़्तूल को शाहे हुदा के मा सिवा अब तक,कभी गोया सरे नोके सिना होते नहीं देखा ।हाजी सरवर अली कर्बलाई ने पढ़ा – ज़िन्दा रहने के लिए शह की रज़ा चाहते हैं,हम तो बस फातिमा ज़हरा की दुआ चाहते हैं ।हैदर आब्दी ने पढ़ा – सब्रे अय्यूब भी सर झुकाकर हो गया शामिल,रास्ते से जारहा था काफिला सज्जाद का ।मजलिस का आगाज़ तिलावते कलाम ए इलाही से हैदर आब्दी ने किया । बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
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