महफिल ए मसर्रत में झूम के बरसे अकीदताओं के फूल मोहम्मद मुस्तफा स.अ. व की बेटी की आमद पर हुई तरही महफिल हमारी तख ईल की जबाँ के सुखन को लुकनत का डर नहीं है: डा. मुहिब
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी। महफिल ए मसर्रत में झूम के बरसे अकीदत ओं के फूल। दरे जहरा पे आके सभी ने अपने मुकद्दर जगाए पर कुछ ऐसे बदनसीब थे जो यहाँ आके भी फायदा न पाए। बाबे जहरा जलाने वालों को माफी नहीं। यह बात करबला सिविल लाइन में बीबी जहरा की विलादत के मौके पर महफिल ए मसर्रत को खिताब करते हुए मौलाना गुलजार जाफरी ने कही। मौलाना ने ये भी कहा कि जहां तारीफ व जर की भूख नहीं होती वहीं शायरी कामयाब होती है। दरे फातिमा बाबे रहमत है। महफिल ए मसर्रत में डा. रजा मौरान्वी ने अपने बेहतरीन अन्दाज में अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा-तभी तो हुक्मे खुदा हुआ है कोई नबी से न तेज बोले, यह किस सहाबी की गुफ्तगू ने बढ़ा दिया इजतराबे रहमत। सारिब मौरान्वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुये पढ़ा-तुम्हारी आमद की आहटों ने लगाए खुशियों के शामियाने, हमारी किस्मत के हाथ आई मसर्रतों की तनाबे रहमत। अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा लिखा हुआ है बराए जहरा सरे वरक इन्तेसाबे रहमत, इसीलिए जेहनों दिल की जीनत बनी हुई है किताबे रहमत। डा. मुहिब रिजवी की शायरी की परवाज बलंद नजर आई उन्होंने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-हमारी तख ईल की जबाँ के सुखन को लुकनत का डर नहीं है, करिश्मा साजी के आसमां पर मिला है हमको लुआब ए रहमत। आरिज जर्गान्वीं ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा-छिपी थी नूरे खुदा में अब तक महक थी उसकी गुलाबे रहमत, मिली है ऐसी खुशी नबी को नही है कोई जवाबे रहमत। मेहदी बाराबंकवी ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा-फजा में बादे सहर भी अपना कदम ठहर के बढ़ा रही है, जमीं पे चादर महक की अपनी बिछा रहा है गुलाबे रहमत। हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा- फलक से उतरा जमीं पे आया खुदा के घर से निसाबे रहमत ,नबी की बेटी जहां में आई कुछ और चमका शबाब ए रहमत ।मुजफ्फर इमाम ने बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-नजर से बुग्जो हसद हटाकर जो देखे मुफ्ती किताबे रहमत, बरस रहा है इन्हीं के घर पर फजीलतों का शहाबे रहमत। कलीम आजर ने पढ़ा-नबी के सीने पर है जो उतरी उसे है कहते किताबे रहमत पढ़े जो कोई भी इसका सूरा उसे भी होगा सवाबे रहमत। बाकर नकवी ने पढ़ा सलाम करता है जिसकी ड्योढ़ी पे आके खुद आफताबे रहमत, कसम खुदा की उसी के दम से खुला हुआ है यह बाबे रहमत। कशिश सन्डीलवी का कलाम कलीम रिजवी ने अजमल किन्तूरी का कलाम अली गंगोल्वी ने,मौलाना रजा का कलाम मीसम रजा ने, हुमा ख्वाहर का बेहतरीन कलाम जईम काजमी ने पेश किया। इसके अलावा जमानत अब्बास और दिलकश रिजवी ने भी बेहतरीन कलाम पेश किया। अजहर जैद्परी, आसिम नकवी, हैदर आब्दी, अयान काजमी, अली, आसिफ अख्तर व रजा मेहदी ने भी नजरानए अकीदत पेश किया। आगाज तिलावते कलाम ए इलाही से मौलाना इब्ने अब्बास ने किया। निजामत बाकर नकवी ने की। बादे महफिल मुल्क के अम्नो अमान की दुआएं की।
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

