सत्ता के दबाव में नहीं हो पाते हैं ट्रांसफर

उन्नाव जिले में सिफारिशी बाबुओं पर शासन के आदेश भी बेअसर।

उन्नाव प्रमोशन के बाद हुए ट्रांसफर को रोकने में सिफारिशी बाबू शासन के आदेश पर भारी पड़ रहे हैं। इसका उदाहरण 3 तारीख में हुए कुछ बाबुओं के तत्काल ट्रांसफर आदेश हैं। आदेश का पालन करने की बजाए बाबुओं ने सिफारिश लगाते हुए प्रमोशन पाने के बावजूद ट्रांसफर रुकवा दिए हैं। उन्नाव में यह मामला कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश सरकार भले ही ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सख्त रवैया अपना रही हो, मगर सिफारिशी कर्मचारी इसका खुला उल्लंघन कर रहे हैं। होने वाले पंचायती चुवाव निर्वाचन विभाग से जुड़े लिपिक संवर्ग के पदों के तहत बाबुओं की पर पदोन्नति हुई। इनको कई बहार जिले में। तैनाती हुई है नगर में ट्रांसफर किया गया। ट्रैफिक की ओर से यह आदेश 3 मार्च को जारी हुए। इनको तत्काल नई तैनाती स्थल पर ज्वाइन करने के आदेश थे। मगर ट्रांसफर आदेश का पालन करने की बजाए बाबू शासन में सिफारिशी पत्र दे गए। इससे विभाग भी हैरान है। सूत्रों की मानें तो वर्षो से जिलों में डटे कई सेटिंग बाज इस्पेक्टरों व दरोगाओं की कुर्सी को हिलाने में एड़ी से चोटी का जोर लगाना पड़ता है लेकिन उन्नाव जिले के प्रशासन पर नेता सत्ता का इतना दबाव होता है कि इस जिले में सिर्फ पहुंच वाले को ही अच्छे थाने व चौकी में पोस्टिंग मिलती है जिसकी सेटिंग नहीं तो उसका कोई काम नहीं की शासन में ऊंची पहुंच है। जिसके चलते पहले भी वह शासन के आदेशों को रद्दी के टोकरे में डाल चुके हैं। शासन के आदेशों का पालन करने पर इन बाबुओं के सिफारिशी पत्रों की इन दिनों लखनऊ राजधानी में खासी चर्चाएं हैं।

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