हैदरगढ़ बाराबंकी। धर्म ही सब का मित्र है संसार के सभी प्राणी एवं पदार्थ नाशवान हैं। एकमात्र धर्म ही सुचारु रुप से जीव के साथ रहता है, वही संकट से रक्षा करता है। यह विचार गोसाईगंज लखनऊ से पधारे कथा व्यास पंडित स्वामी दीन शुक्ला रामायणी ने बहुता धाम में चल रहे सम्मेलन के चैथे दिन व्यक्त किये। रामायणी जी ने बताया कि वेद उपनिषद रामायण पुराण सभी शास्त्रों का एक ही मत है कि भगवान मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं और स्वयं धर्म का पालन करके संपूर्ण समाज को धर्म के अनुकूल आचरण करने की सीख देते हैं अन्याय से दूर रहना तथा दूसरों को सुख देना ही धर्म का सार है। लखनऊ से समागत साहित्य मनीषी प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र नाथ पांडे ने कहा कि ईश्वर सर्व व्यापक और सर्व समर्थ है। अतः उस पर विश्वास करके मन से उसका ध्यान करते हुए अपने कर्म पथ पर चलना चाहिए। इससे मनुष्य द्वारा किए जाने वाले सभी शुभ संकल्प पूरे होते हैं मानस में लंकिनी हनुमान जी से यही कहती है की कौशलाधीस भगवान राम को हृदय में धारण कर लंका में सीता की खोज करो। अवश्य ही तुम्हें सफलता मिलेगी। अतः तुलसी का यह संदेश है कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य से भगवान को जोड़कर जीवन पथ पर चलना चाहिए। पंडित अजय शास्त्री बिंदु ने अपने संगीतमयी प्रवचन के माध्यम से बताया कि संपूर्ण ब्रम्हांड ही भगवान का विराट स्वरूप है।। अतः पृथ्वी जल वायु वृक्ष वनस्पति सभी की सुरक्षा एवं सेवा भगवान की सेवा है। इसलिए जल वन पृथ्वी आदि प्राकृतिक तत्वों को देवता के रूप में स्वीकार कर वेदों में इसकी स्तुति की गई है।
सैफ़ अली संवाददाता थाना हैदरगढ़ की रिपोर्टर

