सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का हुआ समापन’

एसएम न्यूज़24टाइम्स के जिला ब्यूरो के साथ मसौली संवाददाता अवधेश वर्मा शांती वर्मा की रिपोर्ट मोबाइल नंबर 8707331705

त्रिलोकपुर, बाराबंकी। कस्बा मसौली स्थित कलिशक्ति पीठ मन्दिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचिका ज्योतिमा शास्त्री ने लंकेस्वर रावण की बहन सूर्पणखा की कथा सुनाकर समापन किया। समापन के बाद आयोजित भंडारे में आसपास के सैकड़ो भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया। कथावाचिका ज्योतिमा शास्त्री ने भक्तो को कथा सुनाते हुए कहा कि सूर्पणखा पूर्व जन्म में सूपनखा इंद्र की नयनतारा नामक अप्सरा थी उर्वशी रंभा मेनका आदि प्रमुख अफसरों में से इसकी गिनती थी एक बार इंद्र के दरबार में अप्सराओं का नृत्य चल रहा था उस समय नयनतारा नृत्य करते समय भू संचालन अर्थात आंखों से इशारा भी कर रही थी जिसे देख इंद्र विचलित हो गए और उसके ऊपर प्रसन्न हो गए। तब से नयनतारा इंद्र की प्रियसी बन गयी तत्कालीन समय में पृथ्वी पर बर्जा नामक एक ऋषि तपस्या कर रहे थे तब नयनतारा पर प्रसन्न होने के कारण ऋषि की तपस्या भंग करने हेतु इंद्र ने इसे ही पृथ्वी पर भेजा परंतु ऋषि की तपस्या भंग होने पर उन्होंने इसे राक्षसी होने का शाप दे दिया। ऋषि से क्षमा याचना करने पर ऋषि ने उससे कहा कि राक्षसी रूप में ही तुझे भगवान के दर्शन होंगे। तब उसी अप्सरा ने देह त्याग के बाद सूर्पणखा के रूप में जन्म लिया था। उसने दृंढ निश्चय कर लिया था कि प्रभु के दर्शन होने पर वह उन्हें प्राप्त कर लेगी वही नयनतारा वाला मोहक रूप बनाकर नयनतारा श्री राम प्रभु के पास गई परंतु एक गलती कर बैठी ह संपूर्ण संसार में मेरे समान कोई नारी नहीं है इसका अर्थ यह हुआ कि संसार में मेरे समान आपकी पत्नी बनने योग्य कोई भी नारी नहीं है। कथा समापन के बाद आयोजित भंडारे में अमरीश वर्मा, गुड्डु यादव, राजू यादव, रामकृपाल मौर्या, अनिल वर्मा, कमल सिंह, रमेश वर्मा, कमला शाह, जितेंद्र वर्मा सहित सैकड़ों साधुसंत एव भक्तजन मौजूद रहे।

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