मानव को अगर जीवित रहना है तो पर्यावरण को बचाना होगा: राज मिश्रा एड.

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719316984

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष लेख

बदायू। बिसौली पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है,परि और आवरण जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास या जो हमारे चारों ओर है। वहीं ‘आवरण’ का मतलब है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण जलवायु,स्वच्छता, प्रदूषण तथा वृक्ष सभी को मिलाकर बनता है,और ये सभी चीजें यानी कि पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखती हैं और उसे प्रभावित करती हैं।  मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। मानव की अच्छी-बुरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना,जलवायु प्रदूषण रोकना,स्वच्छता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं। मानव की बुरी आदतें जैसे पानी दूषित करना,बर्बाद करना,वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई करना आदि पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रही हैं। जिसका नतीजा मानव को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करके भुगतना पड़ रहा है। अगर मानव को पर्यावरण को बचाना है तो अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर उसको सहेजना भी है। जिससे समस्त मानव प्रजाति बची रहे। अन्यथा अगर ऐसे ही वृक्षों व पर्यावरण से छेड़छाड़ होती रही तो जीवन भयावह हो सकता है और पृथ्वी पर मानव को अपना जीवन बचाना भारी पड़ेगा।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719316984

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