फसल में फाल आर्मी वर्म से बचाव के उपाय
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी(एसएम न्युज24टाइम्स) । वर्तमान में खरीफ की फसलें खेतों में तैयार होने वाली है उनकी सघन निगरानी की आवश्यकता है फसल की लगातार निगरानी होने से जैसे ही किसी कीट या व्याधि का प्रकोप दिखाई देता है तत्काल उसका नियत्रंण करके उसके द्वारा फसल उत्पादन में होने वाली क्षति को रोका जा सकता है। उक्त जानकारी देते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रीति किरन बाजपेई ने आगे बताया कि वर्तमान में मक्का की फसल लगभग तैयार होेेने वाली है लेकिन कहीं-कहीं विलम्ब से मक्का बोई गई है तो उस फसल में फाल आर्मी वर्म का प्रकोप हो सकता है यह मुख्य रूप से मक्का व गन्ना को क्षति पहुॅचाता है। किन्तु यह फसलें न मिलने पर ज्वार बाजरा व अन्य फसलों को भी क्षति पहुॅचाता है इसकी पंखदार मादा तितली मक्के के तनों में छेद करके अण्डे रोप देती है। जिनसे एक भूरी या गहरी भूरी सूंडिया(लार्वा) निकलती है जो तना पत्ती व भुट्टे सहित पूरे पौधे को क्षति पहुुॅचाती है। इसकी सूड़ी के सिर पर उल्टा अंग्रेजी के अक्षर वाई (वई) के आकार की आकृति बनी होती है तथा पीछे चार काले बिन्दु होते है। इनके प्रकोप होने पर निम्नलिखित में से किसी एक रसायन का छिड़काव किया जा सकता है। वैसिलस थ्यूरीजेनसिस 1 किग्रा/प्रति हेक्टेअर या नीम आयल 2.500 ली. प्रति हेक्टेअर अथवा इमामेक्टीन बेन्जोएट 250 ग्राम प्रति हेक्टेअर को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें ।
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

