अमेरिका ने फ़िर जगज़ाहिर आतंकवाद की वकालत की, जापानियों पर परमाणु बम मारने वाले को आप क्या कहेंगे?

अमेरिकी रक्षामंत्री ने शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या का दोबारा औचित्य दर्शाने की चेष्टा की है
अमेरिकी रक्षामंत्री मार्क एस्पर ने शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी के ख़िलाफ निराधार दावों की पुनरावृत्ति करते हुए एक बार फिर उनकी हत्या का औचित्य दर्शाने की चेष्टा की है।
समाचार एजेन्सी तसनीम की रिपोर्ट मार्क एस्पर ने गुरूवार को जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत का औचित्य दर्शाने हेतु अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी दावों की ओर संकेत किया और कहा कि जनरल सुलैमानी अमेरिकी सैनिकों पर हमले की योजना बना रहे थे।
इससे पहले भी मार्क एस्पर ने जनरल क़ासिम सुलैमानी को शहीद करने हेतु ट्रंप सरकार के आतंकवादी कृत्य का औचित्य दर्शाया था।
जानकार हल्कों का कहना व मानना है कि इस बात के कोई सुबूत नहीं है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी अमेरिकी सैनिकों की हत्या की योजना बना रहे थे और अगर वह अमेरिकी सैनिकों की हत्या की योजना बना रहे थे तो अमेरिकी अधिकारी अपने इस दावे का सुबूत क्यों नहीं पेश करते। उनका सुबूत पेश न करना ही उनके दावे के निराधार होने का सुबूत है।
दूसरी बात थोड़ी देर के लिए मान भी लिया जाये कि वह ऐसा कर रहे थे तब भी अमेरिका को उन्हें शहीद करने का कोई हक़ नहीं बनता। क्योंकि केवल अटकलों और संदेहों के आधार पर किसी को भी सज़ा नहीं दी जा सकती।
रोचक बात यह है कि अमेरिका किसी प्रकार के प्रमाण के बिना अपने आतंकवादी कृत्यों का औचित्य दर्शाता है और सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और यमन जैसे विश्व के विभिन्न देशों में जो काम करता है उसे आतंकवाद विरोधी मुकाबले के नाम देता है।
यही नहीं अमेरिका ने जापान के दो नगरों हीरोशीमा और नाकासाकी पर परमाणु से हमला करता है जिसके परिणाम में लगभग दो लाख लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे, अमेरिका ने आज तक उसे न तो आतंकवादी हमला कहा और न ही आज तक उसके लिए माफी मांगी।
इसी तरह अमेरिका अतिक्रमणकारी ज़ायोनी शासन के सरकारी आतंकवाद का समर्थन करता है और सदैव ज़ायोनी सैनिकों की अतिक्रमणकारी कार्यकारी कार्यवाहियों का औचित्य दर्शाता है और उन्हें आत्म रक्षा में की गयी कार्यवाही का नाम देता है और जो फिलिस्तीनी अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए जायोनी सैनिकों के अतिक्रमणों और हमलों का मुकाबला करते हैं उन्हें वह आतंकवादी कहता है।
इन जानकार हल्कों का कहना है कि अमेरिका को बहुत अच्छी तरह पता है कि कौन आतंकवादी है और कौन आतंकवादी नहीं है और जिसे भी वह आतंकवादी कहता है वास्तव में वह आतंकवाद विरोधी होता है और यह हल्के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के महानायक जनरल क़ासिम सुलैमानी को अमेरिका द्वारा शहीद किये जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखते हैं।

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