पार्क का अस्तित्व मिटाने पर तुला है नगर पालिका प्रशासन, जनता में बढ़ रहा है आक्रोश

अब्दुल मोईद संवाददाता बाराबंकी

राष्ट्रभाषा परिषद के अध्यक्ष अजय सिंह व वयोवृद्ध समाजसेवी ने खोला नगर पालिका के विरूद्ध मोर्चा।

बाराबंकी। लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि धूमिल करने में जिले की सरकारी मशीनरी बाज नहीं आ रही हैं, जनाक्रोश के बावजूद भी नगर पालिका प्रशासन दबंगई व हठधर्मिता पर अवैध रूप से जीना बनाकर पार्क, उद्यान के स्वरूप को आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से बदलने पर अड़ा हुआ है। संतकवि बैजनाथ के नाम से बने पार्क के अस्तित्व मिटाने के लिए जर्जर छतों का सौदा करके पार्क के ऊपर से जीना निकालने का कार्य किया जा रहा है। मालूम हो कि इस सम्बंध में करीब एक माह पूर्व खबर प्रकाशित हुई थी कि ‘‘नगर पालिका के ई0ओ0 कर रहे हैं चमत्कार पर चमत्कार’’ उस समय नगर पालिका मार्केट की छत को बिना रास्ता दिये बेच दिया गया था किन्तु छत क्रय करने वाले ने जब रास्ता मांगना शुरू किया तो नगर पालिका के जिम्मेदारों को इस सर्दी में पसीने छूटने लगे। वही राष्ट्रभाषा परिषद के अध्यक्ष अजय सिंह व वयोवृद्ध समाजसेवी ने खोला नगर पालिका के विरूद्ध मोर्चा और जिलाधिकारी से मांग किया कि पुरानी दुकानों की जर्जर छतों का आवंटन रोका जाये तथा सन्तकवि बैजनाथ उद्यान, पार्क के मूल स्वरूप की रक्षा की जाये।
जिलाधिकारी को भेजे गये शिकायती पत्र संख्या-मेमो0/रा0पं0/22-23 में राष्ट्रभाषा परिषद, बाराबंकी के जिलाध्यक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाया कि नगर पालिका परिसर में कई वर्ष पुरानी इन्दिरा मार्केट स्थित है। उर्पयुक्त मार्केट में रामकथा साहित्य के महान भाष्यकार सन्तकवि बैजनाथ की प्रतिमा सहित एक छोटा पार्क है जो लोहे की रेलिंग से घिरा हुआ सुरक्षित है। पार्क व प्रतिमा की स्थापना तत्कालीन जिलाधिकारी की अनुमति से दिनांक 29 सितम्बर 1986 में नगर पालिका की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण हमारी संस्था राष्ट्रभाषा परिषद, बाराबंकी को अपने व्यय से किये जाने की स्वीकृति प्रदान की थी, तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका ने पत्रांक संख्या-34/मु0का0/दिनांक 27-28 अप्रैल, 1987 द्वारा लिखित रूप से प्रदान की थी। उक्त पार्क व प्रतिमा स्थापना कार्य जनसहयोग से पूरा करके संतकवि बैजनाथ की प्रतिमा का लोकार्पण उ0प्र0 हिन्दी संस्थान लखनऊ के तत्कालीन अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त वर्मा की अध्यक्षता में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा के कर कमलो से 28 जनवरी 1995 को सम्पन्न कराया था, तब से उक्त पार्क व उद्यान का संरक्षण व देखभाल राष्ट्रभाषा परिषद कर रही है। नगर पालिका के अधिकारी व वर्तमान अध्यक्ष के पति अनुचित लाभ कमाने की नीयत से उक्त पार्क के समीप स्थित एक मंजिला दुकानों की छतों पर जाने के लिए जीना/सीढ़िया दबंगई के बल पर बनाना चाहते है। जो नितान्त अनुचित व अवैध कार्य है। छतों पर किसी प्रकार का निर्माण किये जाने से पार्क की प्रकृति प्रभावित होगी तथा पार्क में धूप न पहुंच पाने से उसके पेड़ पौधें भी नष्ट हो जायेंगे। विगत दिनों नगर पालिका के कर्मचारी मजदूरों द्वारा पेड़ पौधों को उखाड़ कर गढ्ढे भी खोद दिये, स्थानीय दुकानदार व जन सामान्य नागरिकों द्वारा विरोध किये जाने पर उन्हें धमकाया जा रहा है, तथा अवैध निर्माण अवश्य किये जाने की चेतावनी दी जा रही है जिससे जनता में अध्यक्ष व ई0ओ0 के विरूद्ध जनाक्रोश बढ़ रहा है।
अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन अपने नाजायज मकसद में कामयाब होगा या वयोवृद्ध समाजसेवी अजय सिंह पार्क को बचाने में कामयाब होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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