(दु:खद) आग में थम गईं मासूम बच्ची की चीखें….मां के कानों तक भी नहीं पहुंचीं मासूम की चीखें
मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984
बदायूं। उझानी हादसे में आठ माह की बेटी भूरी को खोने वाली रामदेई घटना के बाद से बदहवास हैं। उन्हें मलाल इस बात का है कि उनके घर में होने के बाद भी उनकी बेटी की जलकर मौत हो गई। सोमवार से उनके मुंह में खाने का निवाला तक नहीं गया है। रिश्तेदार उन्हें समझाने का प्रयास करते हैं तो वह बिलखने लगती हैं। कहतीं हैं, ऐसा क्या हुआ कि मासूम बेटी की चीखें तक उन्हें सुनाई नहीं दीं। क्या पता था जो आग उसे ठंड से बचाने के लिए जलाई थी वही उसका काल बन जाएगी। उसके कलेजे के टुकड़े की जान सहज नहीं गई होगी यही सोचकर रामदेई बदहवास हो जाती है। जिसने भी रामदेई समझाने की कोशिश की, उसकी जुबां पर महज इसके सिवाय कुछ नहीं आता है कि अलाव तो उसने ही जलाया था। सास सरला और परिवार की अन्य महिलाओं ने उसे खाना खिलाने की काफी कोशिश की लेकिन उसने थाली से निवाला नहीं उठाया।
सरला ने बताया कि भूरी के चीखने की आवाज रामदेई को सुनाई नहीं दी क्योंकि वह घरेलू कामकाज में व्यस्त थी। अगर हादसे के दौरान घर में कोई और बच्चा होता तो यह अनहोनी नहीं होती। वह उसे आग की चपेट में आने से भले ही नहीं बचा पाता, लेकिन शोर मचाता तो रामदेई जरूर सुन लेती। ऐसे में भूरी की जान बच सकती थी। चारपाई में प्लास्टिक की पट्टी पिघलने से अलाव में गिर गई थी मासूम:- चारपाई की प्लास्टिक की पट्टी आग को ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पाती है। आशंका है कि सबसे पहले पट्टी पिघली होगी। यह भी हो सकता है कि पट्टी पिघलने के बाद अलाव में लपटें उठी हों और मासूम उसमें गिर गई हो। पड़ोस की एक महिला का तो यहां तक कहना है कि मौत के बाद जब उसकी नजर भूरी पर पड़ी तो उसके शरीर से प्लास्टिक की पट्टी के अंश लिपटे थे। जो कंबल उसे ओढ़ाया गया था, वह भी काफी हद तक जल चुका था।
मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984

