टी.आर.सी. लाॅ काॅलेज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के अन्तिम दिन आयोजित…
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
बाराबंकी: इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की टीम ने जीता द्वितीय टीआरसी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का फाइनल, सेवानिवृत्त न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ खण्डपीठ एवं डीजी ट्रेनिंग, उ.प्र. ने किया पुरस्कृत सतरिख स्थित टी.आर.सी. लाॅ काॅलेज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के अन्तिम दिन फाइनल राउण्ड आयोजित हुआ जिसमें इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ एवं जयपुर यूनिवर्सिटी की टीमों ने प्रतिभाग किया। फाइनल राउण्ड को भूतपूर्व न्यायाधीश, श्री अनिल कुमार हाईकोर्ट इलाहाबाद, लखनऊ खण्डपीठ, डा. संजय एम. तरडे, डीजी टेªनिंग, उत्तर प्रदेश पुलिस, डाक्टर अभिषेक तिवारी एसोसिएट प्रोफेसर, विधि संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा प्रोफेसर (डा.) अजय कुमार सिंह, विधि संकाय साकेत पीजी काॅलेज, अयोध्या की बेंच ने जज किया।
मूटकोर्ट की बहस का विषय धारा 302 भा.द.सं. पर था जिस पर धारा 84 का बचाव लेते हुए अपनी बहस को रखना था। फाइनल राउण्ड शुरू होते ही सर्वप्रथम अपीलांट ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालयों के निर्णयों को नजीर प्रस्तुत करते हुए धारा 84 पर अपना पक्ष रखते हुए बहुत तार्किकपूर्ण ढंग से कहे गए अपराध के पक्ष में बचाव प्रस्तुत किया। साथ ही मानसिक दुराश्य एवं विकृतचित्ता पर तार्किकतापूर्ण तरीके से अपने पक्ष को रखा। उनकी बहस पर न्यायाधीशों ने विभिन्न प्रकार के प्रश्न भी किए जिसका उत्तर अपीलांट पक्ष के प्रतिभागियों ने बखूबी दिया। अपीलांट के प्रतिभागियों ने बखूबी दिया। विधि में तमाम प्रावधानों में उल्लखित कानूनों का हलावा भी दिया। जिसे जजों की टीम ने गम्भीरता से सुना। लगभग 40 मिनट लम्बी बहस के बाद रिस्पांडेन्ट टीम को भी जब बोलने का मौका मिला तो उन्होंने विधिक चित्तविकृतता एवं चिकित्सीय चित्तविकृतता पर तमाम केस ला एवं धारा 84 भा.द.सं. एवं मृत्युकालिक कथन का बचाव करते हुए अपीलांट के कथन का प्रत्युत्तर दिया। उपस्थित जजों ने कई क्रांस प्रश्न रिस्पान्डेंट टीम से भी किया जिसका उत्तर टीम के सभी सदस्यों ने बखूबी दिया। दोनों पक्षों की बातों को सुनने के पश्चात् उपस्थित जजों द्वारा प्रदत्त अंकों की गणना के आधार पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की टीम को विजेता तथा जयपुर यूनिवर्सिटी की टीम को उपविजेता घोषित किया गया। फाइनल राउण्ड के खत्म होते ही जजों के पैनल ने विजयी होने वाली इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ टीम की अलीजा आब्दीन, मदीना हाशमी, कीर्ति जैन को नकद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र एवं ट्राॅफी प्रदान कर सम्मनित भी किया। जयपुर यूनिवर्सिटी की रनर टीम के प्रतिभागियों को भी नकद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र एवं ट्राॅफी देकर सम्मानित किया। साथ ही सभी 42 प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं विधि की पुस्तक देकर सम्मानित भी किया गया।
भूतपूर्व न्यायाधीश अनिल कुमार ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी को अभी से बेसिक ज्ञान कंठस्थ करना चाहिए जिससे आप सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकें। हमेशा केस का विस्तृत एवं बारीकी से अध्ययन करना चाहिए तथा झूठे तथ्य कभी भी प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। उन्होंने छात्र छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पाने के लिए गुरू बनाना आवश्यक है, बिना गुरू के कुछ पाना सम्भव नहीं है। कार्यक्रम को डीजी ट्रेनिंग, उ.प्र.पु. संजय एम.करडे, एसोसिएट प्रोफेसर ल.वि.वि अभिषेक तिवारी, प्राचार्य डा. अश्वनी कुमार गुप्ता आदि ने भी सम्बोधित किया। अन्त में विधि महाविद्यालय के प्रबन्धक डा. सुजीत चतुर्वेदी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित कर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रतियोगिता के समस्त प्रतिभागी एवं समस्त छात्र छात्राएं तथा प्रवक्तागण उपस्थित रहे। बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500

