चंद्रमा के बाद सूर्य बनेगा आत्मनिर्भर भारत का साक्षी:योगी आदित्यनाथ
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भारत के पहले सोलर मिशन आदित्य-एल1 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग पर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसरो सहित पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह मिशन भारत की शक्ति व सामर्थ्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण मानवता की सेवा के ध्येय के साथ आज नए भारत की सामर्थ्य का प्रतीक पीएसएलवी-सी57/आदित्य-एल1 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 140 करोड़ देशवासियों की आशाओं का ‘नया सूर्य’ बने इस प्रतिष्ठित मिशन की पूर्ण सफलता के लिए अनेक मंगलकामनाएं। चंद्रमा के साथ ही अब सूर्य भी आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का साक्षी बनेगा।
आदित्य एल1 को सूर्य तक पहुंचने में लगेगा चार महीने का समय,सूर्य से निकलने वाली उर्जा के रहस्य का लगाएगा पता
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाले मिशन है। इसके साथ ही इसरो ने इसे पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय सौर मिशन कहा है। आदित्य-L1 का प्रक्षेपण आज सुबह 11:50 बजे किया गया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आदित्य एल1 का प्रक्षेपण किया गया। भारत का आदित्य एल1 अभियान सूर्य की अदृश्य किरणों और सौर विस्फोट से निकली ऊर्जा के रहस्य सुलझाएगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है। दरअसल, लैग्रेंजियन बिंदु वे बिंदु हैं जहां दो वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले सभी गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। आदित्य एल-1 को लैंग्रेंजियन बिन्दु 1 (एल1) तक पहुंचने में करीब चार महीने का समय लगेगा। इस दौरान यह 15 लाख किलोमीटर का सफर तय करेगा।

