उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ की वर्चुअल बैठक में संघ ने बोनस के नाम पर ठगी का आरोप लगाया है। जोनल कोषाध्यक्ष कुन्दन सिंह वीरू ने बताया कि मान्यता प्राप्त युनियन सरकार की पिछलग्गू बन कर रह गई हैं। जो समय समय पर कर्मचारियों को ठगने का काम करती है। कभी पुरानी पेंशन के नाम पर, कभी निजीकरण के नाम पर और अब बोनस के नाम पर। उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ कई बर्षो से बोनस बढ़ाया जाए इसके लिए संघर्षरत है परंतु रेल की मान्यताप्राप्त कटपुतली युनियन सरकार के साथ खड़ी जिससे बोनस की सिलिंग बढ़ाई जाने की लड़ाई उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ संबद्ध भारतीय रेलवे मजदूर संघ अकेले लड़ रही है। कार्यकारी अध्यक्ष संकेत सुमन त्रिपाठी ने कहा कि जब सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्युनतम वेतनमान 18 हजार है तो बोनस राशि छठवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतन 7 हजार के सिलिंग पर क्यों दिया जा रहा है। इस बार भी बोनस की राशि दशहरे से पहले ही प्रत्येक रेलवे कर्मचारी के खाते में 17951 रूपए आ गए हैं परन्तु यह कर्मचारी ठगा महसूस कर रहा है। यदि इमानदारी से सातवें वेतनमान के अनुसार न्यूनतम वेतन 18 हजार की सिलिंग पर बोनस दिया जाता तो 78 दिन का बोनस 46159 रूपए बनता है। 2016 में सातवें वेतन आयोग की घोषणा हो चुकी है और कर्मचारियों को सारी सुविधाएं सातवें वेतन आयोग के अनुसार मिल भी रही है परन्तु बोनस पर सरकारी कर्मचारियों के साथ भेदभाव हो रहा है। उत्तर मध्य रेलवे ट्रैकमेंटेनर एसोसिएशन के महामंत्री मनोज यादव ने बताया कि जो सरकारी कर्मचारियों को बोनस मिल रहा है यह भारतीय मजदूर संघ की ही देन है और बोनस की सिलिंग 7 हजार से 18 हजार करवा कर ही मानेंगे। इस वर्चुअल बैठक में अरविंद गुप्ता, मनोज गोस्वामी, राकेश रंजन, मणिहरण, विनोद त्रिपाठी, प्रवीण मिश्रा, रविन्द्र कुमार, अभिषेक, अमित आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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