ख़ौफ़नाक सन्नाटा, लाशों की लाइनें, एक महीने में क्या से क्या हो गई इटली की हालत?!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
एक महीना पहले उत्तरी इटली के बादवा शहर के क़रीब अस्पताल में ओदरियानो ट्रीवीसान की कोरोना वायरस से मौत हुई थी वह यूरोप में कोरोना से होने वाली पहली मौत थी।
इसके बाद एक महीना गुज़रते गुज़रते इटली का तो रूप ही बदल गया है। एक महीने के भीतर लगभग 5 हज़ार लोग मर चुके हैं। इटली की छह करोड़ की आबादी में किसी के भी दिमाग़ में यह बात नहीं आई होगी कि वह घर में बंद होकर रह जाएगा वह भी कितनी अवधि के लिए इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता।
महामारी फैल जाने के साथ ही मनोरंजन और सैर सपाटे के सारे स्थान बंद हो चुके हैं, कर्फ़्यू लगा दिया गया है। एक चिंताजनक बात यह हुई कि उत्तरी इटली में कोरोना वायरस की वजह से कर्फ़्यू लगाया गया तो बड़ी संख्या में लोग दक्षिणी इलाक़ों की ओर रवाना हो गए और अपने साथ वायरस भी ले गए। दक्षिणी इटली के बहुत दूरदराज़ वाले इलाके बोलिया में भी बीमारी फैल गई और कोरोना से 26 लोग मर गए। यह स्थिति देखकर प्रधानमंत्री जोज़ीनी कोंटी ने पूरे देश में कर्फ़्यू का एलान किया। यह 10 मार्च की तारीख़ थी।
इटली में तेज़ी से मौतें होने लगीं तो सरकार ने लोगों को घरों में रोकने के लिए कड़े क़दम उठाने शुरू कर दिए। शुरू में सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों की आम जनता के बीच आलोचना की जा रही थी लेकिन हालात की गंभीरता का आभास हो जाने के बाद सभी इन उपायों का समर्थन करने लगे।
दस मार्च के बाद इटली वासियों ने घर के भीतर रुके रहने को पूरी गंभीरता से लिया। अब वह बाहर निकलने के बजाए खिड़की पर खड़े होकर ही दिल बहला लेते हैं।
मगर इटली की मदद के लिए वहां पहुंचे चीन की रेड क्रास संस्था के डिप्टी चीफ़ सोन शोबिंग का कहना है कि सरकार ने महामारी को रोकने के लिए जो क़दम उठाए हैं उनमें अभी और कड़ाई करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाना ज़रूरी है। एक व्यक्ति को भी घर से बाहर न निकलने दिया जाए।
बड़ी ख़ौफ़नाक स्थिति यह है कि मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को पिछले 24 घंटे में मरने वालों की संख्या बतायी गई तो पता चला कि 793 लोगों ने दम तोड़ दिया। इतनी संख्या में मरने वालों के अंतिम संस्कार का मसला भी काफ़ी गंभीर है। इसके लिए सेना की मदद ली जा रही है।

