कथा वाचक ने रखवारी की चौपाई सुनाते हुए भक्तो को भक्ति मे लीन कर दिया।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। विकास खण्ड मसौली की ग्राम सिसवारा मे चल रहे रुद्रात्मक हनुमत महायज्ञ एव वेदांत संत सम्मेलन के आठवे दिन रामनगरी अयोध्या से आये कथाव्यास पंडित ओमप्रकाश त्रिपाठी ने होम करन लागे मुनिझारी, आप रहे मख की रखवारी की चौपाई सुनाते हुए भक्तो को भक्ति मे लीन कर दिया।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते है उसके बाद आहिल्या का उद्यार करते है गौतम पत्नी का उद्धार करने के पश्चात भगवान श्रीराम गंगा स्नान करते है विश्वामित्र गंगा अवतरण की राम जी को देव नदी गंगा की महिमा का गान करते है। श्रीराम कथा की दूसरी पाली में शहजहापुर् से आयी अनुराधा शुक्ला ने जनक पुर मे विश्वामित्र सहित राम लक्ष्मण जी के आगमन की कथा सुनाते हुए कहा कि राम और लक्ष्मण
विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे। इससे पहले रास्ते में उन्हें एक शिला दिखाई दी। राम को विश्वामित्र ने बताया कि किस प्रकार गौतम की पत्नी शिला बन गयी थी। राम के चरण के स्पर्श से शिला ने पुन: नारी रूप धारण कर लिया। रामायण में इस प्रसंग को अहल्या उद्धार नाम दिया गया। अहल्या उद्धार के बाद विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण जनकपुरी की ओर बढ़ गये। जनकपुरी में विश्वामित्र के 88 हजार ऋषियों के साथ आने की खबर लगते ही राम के दर्शन के लोग व्याकुल होने लगते हैं। युवतियां झरोखों से देखने लगी। वह वार्ता करने लगीं कि इन्होंने ही ताड़का, सुबाहू और मारीच का वध किया है। इनके चरण छूने से पत्थर की अहिल्या का उद्धार हो गया। नगर भ्रमण के पश्चात गुरुदेव की पूजा को भगवान पुष्प तोड़ने के लिए जाते है वहां पर माली उन्हें प्रवेश नहीं करने देता है। कहता है कि ये जनाना बागीचा है। आप या तो जनक लली श्री जानकी की जय बोलो तब आपको फूल तोड़ने दिया जाएगा। परन्तु हठ करने पर राम लक्ष्मण प्रवेश कर जाते हैं। जानकी जी गिरिजा पूजन को जाती हैं। राम की छवि देख कर एक सखी पागल हो जाती है। वह सीता व अन्य को पूरा वर्णन सुनाती है।
इस मौक़े पर पुजारी शिवकुमार वर्मा, अशोक कुमार दिलीप कुमार, जगदीश कुमार, अरविन्द कुमार वर्मा, ऋषि यादव, नीरज श्रीवास्तव, अवधराम गुप्ता, श्यामचरण गुप्ता, विनोद वर्मा, आशीष कुमार वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।

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