बाराबंकी। बज़्म अफ़्क़र बाराबंकी की मासिक तरही नशिस्त गुलिस्तान शेर के कशाना ताज में आयोजित की गई।जिसकी अध्यक्षता जाबिर एडवोकेट और निज़ामत फ़ज़ील इस्लाही ने की।
इस अवसर पर शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम प्रस्तुत किए।
दर हक़ीक़त दर्द इस्लामी हमारे पास है।
इसलिए अब भी रवादारी हमारे पास है। जाबिर एडवोकेट,
कुछ ख़ुशी दे दे हे हमें भी ऐ ख़ुदावंदे करीम।मुद्दतों से तंग दामानी हमारे पास है।।अमीर हमज़ा आज़मी,
प्यार हमसे करती है सोती हमारे पास है। एक गुड़िया जैसी जो पोती हमारे पास है।। डॉक्टर रेहान अलवी,
कर रहे हैं फूलों की कांटे निगहबानी यहां। और कांटों की निगहबानी हमारे पास है।। इरशाद बाराबंकवी,
तजुरुबों की तल्ख़ सामानी हमारे पास है। दर्द आंसू ख़ून और पानी हमारे पास है।।अदील मंसूरी,
दौलत -ए क़ुरआन रब्बानी हमारे पास है। ये अमानत एक लासानी हमारे पास है।।बशर मसौलवी,
उससे मिलने की जब आसानी हमारे पास है। फिर भला कैसी परेशानी हमारे पास है।।फ़ज़ील इस्लाही,
इब्ने आदम को ये है सौग़ात दुनिया में नज़र।हर क़दम पर ही परेशानी हमारे पास है।।नज़र मसौलवी,
जिस तरफ़ जाते हैं आपना नूर फैलाते हैं हम, चांद की मानिंद ताबानी हमारे पास है।।नफ़ीस बाराबंकवी,
दौरे हाज़िर की हर आसानी हमारे पास है। यानि दौलत की फ़रावानी हमारे पास है।। ताबिश बाराबंकवी,
हुक्मराने वक़्त से सुफ़यान ये कह दे कोई।शहरे दिल की अब भी सुल्तानी हमारे पास है।।सुफ़ियान बाराबंकवी,
ख़्वाब में कल तक जिसे हम सिर्फ़ देखा ही किए। रब की रहमत से वो अब रानी हमारे पास है।। सुभाष यादव जवाहरी,
बज़्म के जनरल सेक्रेटरी इरशाद बाराबंकवी ने सभी शायरों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
अगली नशिस्त “इत्साल जामो मीना देर पा होता नहीं” मिसरा तरह पर मार्च के पहले इतवार को होगी।

