हमारा अगला सियासी कदम (मुसलमान, युवा, गरीब, किसान, दलित, पिछड़े, सर्वण) इंसान की हर जायज लडाई के लिए उठेगा – पूर्व मंत्री आबिद रजा

मुकीम अहमद अंसारी

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में की प्रेसवार्ता।

पूर्व मंत्री आबिद रजा ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के पद से दिया इस्तीफा।

बदायूं। हिन्दु भाईयों के वोट को सहेज के ना रख पाना व मुस्लिम लीडरशिप को बहुत खूबसूरत अन्दाज से खत्म करना, आम मुसलमान की जायज बातों पर पार्टी की तरफ से कोई आवाज ना उठाना, मुसलमान वोट की कद्र, कीमत, एहमियत को पार्टी में कम समझना, मुसलमान के सियासी जज्बातों, सियासी हिस्सेदारी के साथ इंसाफ ना करना, गठबन्धन के साथियों से बेहतर Cordination ना रख पाना व सच कहने वाले नेता व कार्यकर्ताओं की बात को नजर अन्दाज करना एवं पार्टी का ओवर कॉन्फिडेन्स लगातार पार्टी को खोखला व कमजोर कर रहा है। पार्टी संर्घष के नाम पर फेसबुक, टिवटर, फोटो सेशन तक रह गयी है, कई सालों से जनता के मुद्दे पर कोई धरना प्रदर्शन ना करना भी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है। यही वजह है कोई भी चुनाव नजदीक आते ही पार्टी को गठबन्धन का सहारा लेना पड़ता है। जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है।

क्या मुसलमान का काम अब पार्टी में सिर्फ पोस्टर लगाना, नारे लगाना, कुर्सिया बिछाना, और टैण्ट बिछाना बचा है। आखिर मुसलमान कब तक पार्टी में टिकट का मोहताज रहेगा 14 फरवरी को हमने आपको P.D.A के मुताबिक राज्यसभा के तीन प्रत्याशियों में से एक प्रत्याशी मुसलमान बनाने की गुजारिश की थी, जिसको नजर अंदाज कर दिया गया। पार्टी के MY फेक्टर में (M) के साथ इंसाफ नहीं हो रहा है। जबकि प्रदेश का मुसलमान तमाम जुल्म और सितम के बावजूद आपके साथ खड़ा है। आने वाले MLC के चुनाव में कम से कम दो मुसलमानों को प्रत्याशी बनाना चाहिये। आगामी लोकसभा चुनाव में भी 20 प्रतिशत मुसलमान के हिसाब से पार्टी में टिकट दिये जाने चाहिये।

सन् 2022 में विधानसभा के चुनाव में मुसलमान के सर्वाधिक वोट के बावजूद पार्टी जीत हासिल नहीं कर पाई थी। इसीलिए 2022 के चुनाव के बाद मुसलमान वोट का रूझान सपा से हट गया था, जिसका नतीजा 2023 के नगर निकाय चुनाव में देखने को मिला। मुसलमान का रूझान सपा से हटकर कांग्रेस की तरफ दिखाई देने लगा था। इसलिए मुसलमान की नाराजगी से बचने के लिए कांग्रेस से गठबंधन किया गया है। हमें गठबंधन से कोई ऐतराज नहीं है. पार्टी ने 2017 में भी कांग्रेस से गठबंधन किया था। कुल 47 सीटे पार्टी जीती थी।
आपने हमें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया इसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। शायद यह पद मुसलमानों को खुश करने के लिए दिया गया हो लेकिन हम मुसलमानों को सच्चाई से रूबरू कराना चाहते हैं इस पद की हैसियत से हमें पार्टी में काम करने का ना कोई अधिकार था यह पद सिर्फ हमें विजिटिंग कार्ड या पेड छपवाने के लिए मात्र दिया गया था। हमारा अगला सियासी कदम (मुसलमान, युवा, गरीब, किसान, दलित, पिछड़े, सर्वण) इंसान की हर जायज लड़ाई के लिए उठेगा

*मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बदायूं*

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