हमेशा अमरीका से सहायता लेने वाले मिस्र ने अमरीकी जनता के लिए भेजी सहायता
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
मंगलवार को विश्व में अमरीका से सबसे ज़्यादा सहायता लेने वाले देशों में से एक मिस्र ने कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे अमरीका के लिए एक विमान में भरकर चिकित्सा सहायता भेजी है।
मिस्र के सैन्य राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से रिश्तों को सामान्य करने के लिए काफ़ी उत्सुक नज़र आ रहे हैं।
अल-सीसी के कार्यालय से जारी होने वाले वीडियो में अमरीका के लिए भेजे जाने वाले सहायता पैकेटों पर अरबी और अंग्रेज़ी में लिखा गया थाः मिस्री जनता की ओर से अमरीकी जनता के लिए।
मिस्र के साथ दोस्ताना रिश्तों की पैरवी करने वाले अमरीकी सेनेटर डच रपरसबर्ग का कहना है कि सहायता सामग्री लेकर अमरीका पहुंचने वाला विमान वाशिंगटन के एंड्रेव सैन्य हवाई अड्डे पर लैंड कर गया है।
यह विमान, 2 लाख फ़ेस मास्क, 48,000 जूते के कवर और 20,000 सर्जिकल कैप्स के अलावा अन्य चिकित्सा सामग्री लेकर पहुंचा है।
रपरसबर्ग ने अमरीका के लिए मिस्र की सहायता पर प्रतिक्रिया जताते हुए ट्वीट कियाः यही कारण है कि मिस्र जैसे दोस्त देशों से न केवल संकट के दौर में बल्कि हमेशा अच्छे संबंध रखना क्यों ज़रूरी है।
क़ाहिरा में अमरीकी राजदूत जोनाथन कोहेन ने भी मिस्र की ओर से की गई सहायता की सराहना की है।
ग़ौरतलब है कि मिस्र में कोरोना महामारी से अब तक 3,300 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 250 लोगों की मौत हो गई है।
दूसरी ओर अमरीका इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला देश है, जहां अब तक 45,000 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं और 8 लाख से भी ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं।
अमरीका के लिए मिस्र द्वारा भेजी गई सहायता पर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जो देश दुनिया में अमरीका से सबसे अधिक सहायता प्राप्त करता रहा है और जहां एक तिहाई आबादी लगभग 1.5 डॉलर या उससे कम पर जीवन व्यतीत करती है, क्या वह किसी दूसरे देश की सहायता करने की स्थिति में है?
इससे पहले मिस्र, इटली, ब्रिटेन और चीन के लिए भी कोरोना सहायता भेज चुका है।
मिस्र ने पिछले महीने द गार्जियन के एक पत्रकार के लाइसेंस को सिर्फ़ इसलिए रद्द कर दिया था, क्योंकि उसने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि इस देश में कोरोना संक्रमण के मामले उससे कहीं अधिक हैं, जितने बताए जा रहे हैं।
अमरीका ने 2018 वित्त वर्ष में मिस्र को 1.2 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की सहायता दी थी, हालांकि यह सैन्य सहायता है, जो मोटे तौर पर अमरीकी ठेकेदारों की जेब में ही चली जाती है।

