श्रीराम कथा में कथावाचक आलोक सरस ने कहा सत्संग हमें भलाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स बाराबंकी
बाराबंकी । विकास खण्ड मसौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत देवकलिया मे चल श्रीराम कथा में कथावाचक आलोक सरस ने कहा सत्संग हमें भलाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। भगवान कथा मनुष्य के सभी इच्छाओं को पूरी करती है । यह कल्पवृक्ष के समान है । इसके लिए मनुष्य को निर्मल भाव से कथा सुनने और सत्य मार्ग पर चलना चाहिए । आगे कहा सती अनुसुइया, प्रजापति कर्दम और देवहूति की नौ बेटियों में से एक थीं.
वे अत्रि ऋषि की पत्नी थीं. अत्रि ऋषि, ब्रह्मा जी के मानसपुत्र थे. सती अनुसुइया का पतिव्रता और सतीत्व इतना अधिक था कि आकाशमार्ग से जाते देवों को भी उनका प्रताप महसूस होता था. रामायण, महाभारत, और पुराणों में सती अनुसुइया का उल्लेख मिलता है. सती अनुसुइया के पातिव्रत्य की परीक्षा लेने के लिए तीनों देवियों ने अपने-अपने पतियों को अनसूया के पास भेजा था. ब्रह्मा, विष्णु, और महेश ने भी अनसूया के सतित्व और ब्रह्मशक्ति की परीक्षा करने का फ़ैसला किया. त्रिमूर्तियों ने यतियों का रूप धारण करके अत्रि ऋषि के आश्रम में भिक्षा मांगी. सती अनुसुइया ने त्रिमूर्तियों का उचित रूप से स्वागत किया और उन्हें खाने के लिए बुलाया. सती अनुसुइया ने अपने सतीत्व से तीनों देवों को बालक बना दिया.श्रीराम और लक्ष्मण पंचवटी वन क्षेत्र में रह रहे थे। पंचवटी क्षेत्र आज महाराष्ट्र के नासिक के पास ही स्थित है। नासिक में बारह ज्योर्तिलिंग में से एक त्रयंबकेश्वर ज्योर्तिलंग भी स्थित है। प्राचीन समय पंचवटी वन क्षेत्र को दण्डकवन भी कहा जाता था। श्रीरामचरित मानस में इस बात का उल्लेख है कि जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीता पंचवटी क्षेत्र में निवास कर रहे थे, तब रावण की बहन शूर्पणखा यहां पहुंच गई थी। इसी क्षेत्र में काटी थी शूर्पणखा की नाक शूर्पणखा, श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर मोहित हो गई और सुंदर वेष बनाकर उनके सामने विवाह प्रस्ताव रखा। श्रीराम और लक्ष्मण ने इस प्रस्ताव से इंकार कर दिया, लेकिन बहुत समझाने पर भी शूर्पणखा नहीं मानी। अंत में शूर्पणखा ने राक्षसी का कुरूप धारण किया, तब लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। इस अपमान का बदला लेने के लिए शूर्पणखा ने अपने भाई रावण से मदद मांगी। शूर्पणखा ने रावण के सामने सीता के सौंदर्य की बहुत तारीफ की, जिससे रावण के मन भी कामभाव जाग गया। रावण पंचवटी (दण्डकवन) पहुंचा और छल से सीता का हरण कर लिया। कथा आयोजक नौमीलाल वर्मा अजीत कुमार शिवनारायण शिवकुमार उत्तमचन्द कन्हैया लाल विरेन्द्र कुमार सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे ।अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स बाराबंकी

