तुम कितने हुसैनी मारोगे हर घर से हुसैनी निकलेगा हुसैन ज़िंदा हैं दस्तूर-ए-ज़िंदगी की तरह शहीद मरते नही आम आदमी की तरह
मुकीम अहमद अंसारी
बदायूं। के समाजवादी युवजन सभा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष व मदर टेरेसा फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष कैफ़ी ज़ैदी ने अपना शोक व्यक्त किया और कहा यक़ीनन रहबर-ए-मुअज़्ज़म की शहादत मिल्लत-ए-इस्लामिया को एक नई हयात दे गई, बेशक़ मोमिन शान से शहीद होते हैं मगर ज़ालिम के ज़ुल्म-ओ-सितम के आगे हरगिज़ घुटने नहीं टेक सकते।
ईरानी रियासत के सरबराह, ईरानी इस्लामी इंक़लाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली हुसैनी ख़ामनेई साहब को मेरा आख़िरी सलाम। अमेरिका-इज़रायल नापाक गठबंधन के आगे ना झुकने वाले ईरानी जम्हूरिया के रहबर ख़ामनेई साहब अपने चाहने वालों के दिलों में ताउम्र हयात रहेंगे।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

