पुलिस ने युवक को मार्फीन तस्करी में सलाखों के पीछे पहुंचाया भाई ने मुख्यमंत्री का खट्खट्ाया दरवाजा

सुधीर कुमार रावत क्राइम रिपोर्टर बाराबंकी

बाराबंकी। जनपद की पुलिस का नया कारनामा हाल ही में कथित फर्जी तौर पर एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजे गए एक युवक की बेबस मां की फरियाद हुक्मरानों की दहलीज पर इंसाफ के लिए चक्कर मार ही रही थी कि मसौली पुलिस ने एक और बेगुनाह को मार्फीन तस्करी में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया इस संबंध में पीड़ित के भाई ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर गांव के ही कुछ लोगों पर चुनावी रंजिश के चलते पुलिस से सांठगांठ कर उत्पीड़न का आरोप लगाया है मोहल्ला कटरा बासा थाना मसौली निवासी निहाल अहमद पुत्र फकीर मोहम्मद ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहां है कि उसके भाई नसरुद्दीन मोहल्ला कटरा थाना मसौली में इरम हैंडलूम के प्रोपराइटर तथा ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के जिला अध्यक्ष होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी है जिनकी पत्नी बीते पंचायत चुनाव में अपनी ग्राम पंचायत से प्रधान पद की उम्मीदवार रहकर चुनाव हार चुकी हैं इसके अलावा नसरुद्दीन सामाजिक कार्यों में आगे रहकर जन सेवा करने में भी काफी रूचि रखते हैं वर्तमान में कोविड-19 के चलते उन्होंने बहुतायत जरूरतमंदों को इमदाद भी पहुंचाई जो विरोधियों को काफी नागवार गुजरा है इसी को लेकर पुलिस से सांठगांठ कर उन लोगों ने उसके भाई के विरुद्ध यह कुल चक्र क्या है प्रकरण कुछ यूं है कि 11 मई को जब नसरुद्दीन बांसा गांव से एक अंतिम संस्कार से लौटकर घर पर बैठे थे कि तभी पुलिस वहां पहुंचकर उनको थाने बुला ले गई अगर उस समय की नसरुद्दीन की मोबाइल के जरिए लोकेशन की जांच की जाए तो नसरुद्दीन की 11 मई 2020 की लोकेशन थाना मसौली में दोपहर 2ः 45 बजे की मिलेगी निहाल के मुताबिक नसरुद्दीन को पुलिस द्वारा ले जाने के तुरंत बाद उसने तत्काल मुख्यमंत्री को प्रकरण से अवगत किया था इसके अलावा दूसरे भाई इकबाल ने आई जी जोन के संज्ञान में भी यह मामला पहुंचाया था जिसके बाद पुलिस ने थाने में ही बैठकर नसरुद्दीन के विरुद्ध डेढ़ सौ ग्राम मार्फिन की बरामदगी संबंधी फर्द लिख दी और फिर प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखकर दूसरे दिन नसरुद्दीन का चालान न्यायालय भेज दिया फरियादी निहाल अहमद ने मुख्यमंत्री से पत्र में अनुरोध किया है कि पुलिस ने उसके भाई की जिंदगी बर्बाद कर दी है नसरुद्दीन का मार्फिन मामले से कोई भी सरोकार नहीं था आवश्यक है कि वाद की विवेचना किसी अन्य एजेंसी से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके ।

सुधीर कुमार रावत क्राइम रिपोर्टर बाराबंकी

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