ग़ौस ए पाक का संदेश तालीम बहुत एहम है। हाफ़िज़ इरफ़ान इस्लाहुल मुस्लिमीन एजुकेशन सोसाइटी, मोहल्ला नवादा, सहसवान

मुकीम अहमद अंसारी

के तत्वाधान में महफ़िल-ए-पाक ग्यारहवीं शरीफ का आयोजन

 

सहसवान, बदायूं। इस्लाहुल मुस्लिमीन एजुकेशन सोसाइटी, मोहल्ला नवादा, सहसवान के तत्वाधान में ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर एक नूरानी और रूहानी महफ़िल का आयोजन किया गया, जिसमें मदरसे के सभी छात्रों ने भाग लिया।

 

इस नूरानी महफ़िल की शुरुआत कलाम अल्लाह की तिलावत से की गई, इसके बाद मदरसे के छात्रों ने शान-ए-ग़ौस-ए-आज़म में मनक़बतें पेश कीं। हाफ़िज़ अज़ीम और अहमद मियां बरकाती ने भी हज़रत ग़ौस-ए-आज़म की शान में मनक़बत पढ़ी।

 

“ग़ौस-ए-आज़म की जिस पर नज़र पड़ गई

चोर कल तक जो था वली बन गया…”

 

इसके बाद मिल्ली व मज़हबी कार्कुन व पूर्व जिला पंचायत सदस्य हाफ़िज़ इरफ़ान साहब, सदर मदरसा हाज़ा ने बेहतरीन ख़िताब फ़रमाया।

उन्होंने कहा कि ग़ौस ए पाक बहुत बड़े सूफी संत के साथ साथ बहुत बड़े विद्वान भी थे आपकी की जीवनी से हमें सबक़ मिलता है कि तालीम बहुत एहम है

उन्होंने अपने ख़िताब में हज़रत ग़ौस-ए-आज़म के बचपन का वह मशहूर वाक़या बयान किया जब आप तालीम हासिल करने के लिए अपने कस्बा जीलान से बग़दाद जाने वाले क़ाफ़िले के साथ रवाना हुए थे। आपकी अम्मी जान ने आपको नसीहत दी थी कि “बेटा कभी झूठ मत बोलना”। आपने हर हाल में सच बोला, यहाँ तक कि डाकुओं के सामने भी सच का दामन नहीं छोड़ा। हाफ़िज़ इरफ़ान साहब ने बच्चों को समझाया कि हमें भी हज़रत ग़ौस-ए-आज़म की इस बात पर अमल करना चाहिए और हमेशा सच बोलना चाहिए।

 

महफ़िल के इंतज़ाम और एहतेमाम में क़ारी अब्दुल हादी बरकाती और क़ारी मुसव्विर रज़ा ने भी इज़हार-ए-अक़ीदत पेश किया।

 

आखिर में बारगाह-ए-रिसालत में सलाम पेश किया गया और मुल्क व मिल्लत की अमन-ओ-अमान और सलामती के लिए ख़ास दुआ की गई।

 

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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